मखाने की खेती बढ़ाएगी कृषकों की आय
{रायपुर में फेल होने के बाद धमतरी में टेस्टिंग।
{यहां की जलवायु मखाना के लिए अनुकूल।
भास्करन्यूज| धमतरी
मखानाकी उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया चीन से हुई है। जापान, कोरिया में भी इसकी खेती होती है। भारत में दरभंगा बिहार के अलावा कुछ महानगरों में होने वाली मखाना की खेती प्रदेश में धमतरी से शुरू हो रही है।
रायपुर में इसके लिए प्रयोग किया गया, लेकिन सफल नहीं हुआ। माहभर पूर्व शहर से 10 किमी दूर संबलपुर कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेप केन्द्र सेहराडबरी में मखाना की खेती का प्रयोग किया गया है। इस खेती के लिए जिले की जलवायु अनुकूल है, इसलिए यह प्रयोग लगभग सफल माना जा रहा है। प्रयोग के तौर पर एक एकड़ में मखाना लगाया गया है। बाद में फिर जिले सहित प्रदेश को इसके बीज बांटे जाएंगे। मखाना को यहां काफी हद तक सफलता मिल गया है। फरवरी में रोपाई की तैयारी है। पत्ते भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
जिले में इस खेती को बढ़ाने नेशनल रिसर्च सेंटर दरभंगा से ट्रेनिंग लेकर पहुंची संबलपुर की उद्यानिकी वैज्ञानिक राजेश्वरी साहू ने बताया कि मखाना को काला हीरा भी कहते हैं। यह एक सूखा फल है, जिसकी तुलना अखरोट, काजू, पिस्ता से कर सकते हैं। प्रसाद के रूप में भी इसे उपयोग करते हैं। मखाना की उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया में चीन में हुई है। भारत के कुछ हिस्से में ही इसकी खेती होती है। पूर्व में इसे रायपुर में उगाने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नही मिली। फिर धमतरी को चुना गया। यहां का मौसम मखाना के लिए काफी अनुकूल है। इसका बीज नेशनल रिसर्च सेंटर दरभंगा बिहार से लाए गए हैं। बिहार में 13 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती होती है। पूर्णत: यह व्यवसायिक खेती है जो देश में बिहार के बाद मणिपुर, पश्चिम बंगाल तक ही सीमित है।
इसके साथ मछली, सिंघाडा की क्रापिंग सिस्टम से खेती कर सकते हैं। इसकी खेती डबरी, बाड़ी खेत में भी कर सकते हैं। जिले की मिट्टी अम्लीय होते जा रही है जो अच्छे संकेत नहीं है। इसलिए फसल परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है।
बाजार में 700 रु किग्रा
आर्थिकदृष्टि से मखाना की खेती उपयोगकर्ताओं के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। प्रति किलोग्राम मार्केट में यह 600 से 700 में बिकता है। खाड़ी देशाे में पांच हजार रू प्रति किग्रा का रेट मिलता है। एनआरसी के अनुसार मखाना में प्रति हेक्टेयर में 45 से 50 हजार मुनाफा ले सकते हैं। मखाना के बाद बारसीन का उत्पादन लेते हैं तो 90 से 95 हजार रू का फायदा मिलता है। इसका उपयोग लोग स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में भी करते हैं। दाल मखनी, कढ़ी में भी इसका उपयोग किया जाता है। पोषक तत्व उपलब्धता की दृष्टि से यह उच्चकोटि की खेती भी है।
इसलिए है उपयुक्त
इसरोके मुताबिक धमतरी में 26 हजार हेक्टेयर गीली जमीन भौगोलिक क्षेत्र का 0.8 प्रतिशत है। मखाना उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु का पौधा है। फसल के लिए तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। सापेक्षिक आर्द्रता 50 से 90 प्रतिशत होना चाहिए। यह जलीय पौधा है। इसे गोरगोन या फाक्सनट भी कहते हैं। जल तालाब, डबरी, झील, खेत में इसकी खेती होती है। इतना ही नहीं मखाना की पत्तियां मिट्टी को आवश्यक पाेषक तत्व प्रदान करती है, जो मृदा के के लिए लाभदायक है। सड़ने के बाद ये मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ छोड़ते हैं।