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जिसकी जरूरत उसे लगाते है नहीं, जिससे परहेज उसे ही अपना रहे लोग, शहर में बढ़ते जा रही नकाबपोशों की संख्या

7 वर्ष पहले
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नकाब से लगाव पर हेलमेट पहनना पसंद नहीं

हर जगह नकाबपोश

नकाबपोशहोना फैशन बन गया है। दुपहिया चलाने के दौरान एवं पैदल चलते समय भी नकाब लगा रहे। गार्डन में धूल होता है धूप,यहां भी नकाबपोश नजर आते हंै। आउटरों में तो उनकी महफिल सजने जैसा माहौल रहता है। बैंक,एटीएम, सब्जी मार्केट,मेडिकल सहित दुकानों में भी खरीदी के दौरान चेहरों से नकाब नही उतरता। नकाबपोशी का फायदा क्राइम से जुडे अपराधी भी उठा सकते है। संवेदनशील स्थानों पर नकाब उतारना चाहिए। लोग ऐसा नही करते तो पुलिस प्रशासन को इस ओर आगे आने की जरूरत है।

धमतरी. दुपहिया चलाने के दौरान हेलमेट की जगह ज्यादातर लोग नकाब ही पहने दिखते हैं।

हेलमेट का हौवा बंद,नकाबपोश बढ़ गए,शहर में यातायात की कार्रवाई हुई सुस्त।

भास्करन्यूज|धमतरी

शहरकी सड़कों में हेलमेट धारियों से ज्यादा नकाबपोश बाइक चालक दिखते हंै। सुरक्षा की दृष्टि से जिसे पहनना चाहिए उसे छोड़ नकाबपोश बनकर लोगो की समस्या बढा रहे हैं। नकाब का प्रचलन क्राइम को बढावा दे रहा है। पहले भी नकाब की आड़ में कई क्राइम हुए हंै।

प्रदेश सरकार ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य किया था। ड्राइवर के साथ पीछे बैठे व्यक्ति को भी हेलमेट पहनाने की योजना थी। यातायात के माध्यम से कुछ दिनों तक यह अभियान शहर में चला, फिर कार्रवाई का जोश ठंडा पड़ गया। हेलमेट की चेकिंग होती है और ही यातायात पुलिस इसे लागू कराने में रूचि दिखा रही। एसपी मनीष शर्मा का ध्यान जनहित से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं है, तभी तो हेलमेट नही पहनने वालों पर कार्रवाई हो रही और ही नकाबपोशी पर पाबंदी लगाई जा रही। महिलाएं,युवतियों के साथ पुरूष भी स्कार्फ को नकाब के रूप में उपयोग कर रहे। धूल से बचने नकाब लगाने की बात लोग कहते हैं, लेकिन हेलमेट लगाकर भी धूल से बचा जा सकता है। जो होना चाहिए उसे लोग अपना नही रहे।