हालर व्यवसायी चाहते हैं मिलिंग
धमतरी. रूपया किलो चावल से ठप हुआ हालर मिलों का काम।
बिजली का झटका
इससमय हालर मिल संचालकों को बिजली िबल का ऐसा झटका लगा है कि अदा कर पाना मुश्किल हो चला है। चेतन साहू,तरूण देवांगन ने बताया कि पहले दो से ढाई हजार तक बिल आता था लेकिन अब 8 सौ रूपए अतिरिक्त बिल थमाया जा रहा है। काम नहीं है और तीन से चार हजार बिल का भुगतान भारी पड़ रहा है।
कस्टम मिलिंग को लेकर जद्दोजहद कर रहे प्रशासन के लिए हालर मिल भी विकल्प।
भास्करन्यूज |धमतरी
जिलेमें लाखों क्विंटल धान की कस्टम मिलिंग नहीं हो पाने से जिला प्रशासन परेशान है, वहीं दूसरी ओर धान कुटाई का काम नहीं चलने से हालर मिल वाले परेशान हैं। एेसे में हालर मिल भी कस्टम मिलिंग के लिए विकल्प हो सकते हंै। प्रशासन को इसके लिए पहल करने की जरूरत है।
मौजूदा समय में जिले में ही सैकड़ों हालर मिल हंै,जहां धान कुटाई का काम ठप है। प्राय: हर गांव में एक या दाे-दो हालर मिल हैं। इन मिलों में धान कुटाई कराने अब लोग नहीं के बराबर अा रहे हंै। हालर मिल संचालकों का कहना है कि सरकार ने लोगों को रूपया किलो चांवल देकर उनका रोजगार छीन लिया है तो काम दें।हालर मिल संचालक चेतन साहू,गीताराम, बडकू,भूषण साहू आदि का कहना है कि धान कुटाई का काम वे भी करते हंै,तो सरकारी धान का मिलिंग भी कर सकते हैं, बशर्ते प्रशासन पहल करे और योजना बनाकर छोटे-मोटे काम दें। हालर मिल लगाने रूचि दिखाएंगे तथा बेरोजगारी भी काफी हद तक दूर होने लगेगी।