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नोटबंदी के बाद चर्रा में 100 की बजाए 10 का सामान ले रहे लोग

5 वर्ष पहले
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जिले के सांसद आदर्श ग्राम चर्रा में नोटबंदी के बाद से लोगों का बुरा हाल है। सबसे ज्यादा परेशानी रोज कमाने खाने वालों को हो रही है, जिन्हें काम करने के बावजूद मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। नोटबंदी से सबकी रोजी-रोटी, कारोबार से लेकर आम दिनचर्या भी बुरी तरह प्रभावित हो गई है। किसान उत्तम बैस ने बताया कि नोटबंदी की वजह से धान कटाई-मिंजाई के दौर में मजदूरों को इसी वजह से मजदूरी भुगतान नहीं कर सके। धान बिका, तब को-अापरेटिव बैंक से 24 हजार की जगह सिर्फ 10 हजार रूपए मिले। अब मजदूरी का भुगतान करें या घर खर्च के लिए बचाकर रखें। दुकानदार प्रीतम ने बताया कि नोटबंदी के बाद से छोटे-बड़े किसी भी आदमी के पास पैसे नहीं है, इसलिए धंधा पूरी तरह बैठ गया है। पहले जो लोग 100 रूपए का सामान खरीदकर जाते थे, वे अब बमुश्किल 10 रूपए की ही खरीदारी कर रहे हैं।

मजदूर रमेसर साहू, श्यामलाल साहू आदि ने बताया कि नोटबंदी के बाद खेतों में काम तो मिला, पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है। दाऊ लोग (किसान) हफ्तेभर काम कराने के बाद इधर-उधर से व्यवस्था कर काम चलाने के लिए दो-तीन सौ रूपए देते हैं। जिससे सब्जी-भाजी व रसोई की अन्य जरूरी चीजों की व्यवस्था कर रहे हैं। अब तो लगता है कि महीनेभर काम करने की मजदूरी नोटबंदी पूरी तरह खुलने के बाद ही मिल पाएगी।

नाम का आदर्श ग्राम
इस बदहाली पर रोष जताते हुए ग्रामवासियों ने कहा कि हमारा गांव नाम के लिए सांसद आदर्श ग्राम है। नोटबंदी के बाद से यहां के लोग किस बदहाली से गुजर रहे हैं, यह देखने न सांसद आए हैं और न ही किसी अधिकारी ने आकर स्थिति सुधारने की पहल की है।

ग्राहक सेवा केंद्र में हमेशा लिंक फेल
ग्रामवासियों ने बताया कि गांव में एक भी बैंक नहीं हैं, लेकिन देना बैंक का ग्राहक सेवा केन्द्र संचालित है। इसके संचालक जीतेन्द्र कुमार साहू का कहना है कि नोटबंदी के बाद से सारे लोग सिर्फ पैसे निकालने के लिए ही आ रहे हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन या चेक से लेनदेन कोई नहीं कर रहा है। सबको नगदी रकम चाहिए। यहां प्रतिदिन ढाई हजार रूपए निकासी की सुविधा है, पर अक्सर लिंक फेल रहने के कारण इसका लाभ भी खातेदारों को नहीं मिल पा रहा है।

धमतरी. नोटबंदी के बाद से चर्रा में सबकी दुकानदारी हुई चाैपट, सुबह से शाम तक खाली बैठे रहते हैं दुकानदार।

चर्रा में देना बैंक के ग्राहक सेवा केन्द्र में ज्यादातर समय लिंक फेल रहने के कारण लटका रहता है ताला।

आदर्श ग्राम का दर्द
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