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अंतिम समय पर आया वेतन, रुकी हड़ताल

5 वर्ष पहले
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अल्टीमेटम दिए जाने के बाद अंतिम समय में वेतन की राशि बैंक खाते में जमा करा दिए जाने के कारण एक बार फिर नगर निगम कर्मियों की बेमुद्दत हड़ताल टल गई, लेकिन भविष्य में यह खतरा हमेशा बना रहेगा, क्योंकि आय और व्यय की अंतर की खाई पाटने की स्थायी व्यवस्था निगम के पास अब भी नहीं है।

बीते नवंबर-दिसंबर महीने से ही नगर निगम कर्मी समय पर वेतन नहीं मिल पाने की समस्या से जूझ रहे हैं, क्योंकि निगम का खजाना खाली है। इस दो माह पहले भी कर्मचारी दफ्तर के सामने पंडाल लगाकर हड़ताल पर जाने के लिए उतारू हो गए थे, तब ऐन वक्त पर महापौर व कमिश्नर ने तत्काल वेतन जारी करने का आश्वासन देकर उन्हें रोका था। महीने भर बाद फिर यही स्थिति आ गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसी तरह कर्मियों के खाते में 12 फरवरी को वेतन की राशि जमा कराई गई, तब हड़ताल टल सकी।

निगम कर्मियों का कहना है कि जब तक आय से अधिक स्थापना व्यय रहेगा, तब तक समय पर वेतन भुगतान की समस्या रहेगी। इसलिए इसका स्थायी समाधान जरूरी है। वर्तमान में यहां 290 नियमित और 210 ठेका कर्मचारी-अधिकारी कार्यरत हैं, जिन्हें वेतन के रूप में हर महीने करीब 65 लाख रुपए का भुगतान किया जाता है। निगम प्रशासन चाहे, तो इसके लिए किसी भी बैंक से अनुबंध कर सकता है। ऐसा होने पर कर्मियों को हर महीने निश्चित तारीख पर वेतन मिल सकेगा।

योजनाएं हवा हवाई
निगम कमिश्नर राकेश जायसवाल का कहना है कि अंतर की राशि की भरपाई करने के लिए आय बढ़ाने की योजना बना ली गई है। इसके तहत शहर में 15 नए व्यावसायिक कांप्लेक्स बनाए जाएंगे। पर इसके लिए जमीन कहां से आ पाएगी, यह कोई बता नहीं पा रहा है।

चाहते हैं स्थायी समाधान
आय से ज्यादा व्यय, बनी रहेगी समस्या
निगम कर्मियों के अनुसार समय पर वेतन भुगतान का यह टेंशन अब हमेशा बना रहेगा, क्योंकि निगम की सालाना आय जितनी है, खर्च उससे करीब 5 करोड़ रुपए अधिक है। पहले अंतर की इस राशि की भरपाई राज्य सरकार अनुदान देकर करती थी, पर अब उसने अनुदान देने से साफ मना कर दिया है और इसकी भरपाई आय के साधन बढ़ाकर करने की हिदायत निगम को दी है, जबकि आय बढ़ाने की गुंजाइश फिलहाल यहां नहीं है। ऐसे में सालाना 5 करोड़ रुपए की अतिरिक्त व्यवस्था करने का टेंशन हमेशा बना रहेगा, जिसका खामियाजा कर्मचारियों-अधिकारियों को भुगतना पड़ेगा।

समाधान
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