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महाराष्ट्र की तर्ज पर राज्य में भी सामाजिक बहिष्कार विरोधी कानून बनाने करेंगे मांग

4 वर्ष पहले
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सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे परिवारों को राहत देने के लिए अब अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति शासन से महाराष्ट्र की तर्ज पर कानून बनाने की मांग करेगी। समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि सामाजिक बहिष्कार के संबंध में प्रादेशिक स्तर पर कोई कानून नहीं बना है।

इस कारण सामाजिक प्रताडना के ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यदि इस संबंध में जल्द सक्षम कानून बनाया जाता है तो हजारों निर्दोष व्यक्तियों को बहिष्कार की प्रताड़ना से बचाया जाना संभव होगा। महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ दूसरा प्रदेश होगा जहां सामाजिक न्याय के लिए सक्षम कानून होगा राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष से मिलने के साथ सभी विधायकों, सांसदों को पत्र लिखकर इस संबंध में कानून बनाने की मांग की गई है। वे राज्य के प्रत्येक जिले में दौरा कर बहिष्कृत परिवारों से भेंट कर रहे हैं। उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है, इसकी रिपोर्ट बना रहे हैं। इन सब रिपोर्ट के साथ वे शासन से कानून बनाने की मांग रखेंगे। बालोद जिले में भी जल्द ही अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति भ्रमण करने आएगी।

महासमुंद में विधायक ने किया कानून का समर्थन
डॉ. मिश्र ने बताया वे अब तक महासमुंद, सरगुजा, कोंडागांव, गरियाबंद, चांपा, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कवर्धा, धमतरी, नारायणपुर, जगदलपुर, कांकेर का दौरा कर लोगो को बहिष्कार के खिलाफ जागरूक करने दौरा कर चुके है। बालोद सहित कुछ जिले में सर्व समाज के बैनर तले बहिष्कार विरोधी कानून का विरोध कर रहे है। जबकि महासमुंद में सभी विधायकों ने इस कानून का समर्थन किया है। राज्य के सभी समाज के लोग बहिष्कार की नीति का त्याग करेंगे।

महाराष्ट्र में अब बहिष्कार पर मिलेगी सात साल की सजा
धीरे-धीरे पूरे देश में सामाजिक बहिष्कार जैसे अमानवीय प्रथा के विरुद्ध जागरुकता का प्रसार हो रहा है। महाराष्ट्र तो एक शुरुआत है। जहां अब सामाजिक बहिष्कार को कानूनी अपराध घोषित कर दिया गया है। वहां इस अपराध में संलग्न आरोपियों को सात वर्ष की कैद या 5 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकता है। इस अपराध में सहायता प्रदान करने वाले को तीन वर्ष की कैद या 3 लाख का जुर्माना या दोनों हो सकता है। आरोपियों पर आरोपित आर्थिक जुर्माने की राशि पीड़ित को दिया जाएगा।आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद छह महीने के अंदर सुनवाई पूरी होगी।

देश के पहले प्रदेश महाराष्ट्र में इसी महीने से लागू हुआ कानून
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा कि महाराष्ट्र में 3 जुलाई से सामाजिक बहिष्कार विरोधी कानून लागू हो गया है। इस प्रकार महाराष्ट्र देश का पहला प्रदेश बन गया है। जहां जाति और समाज के नाम पर मनमानी करने वाले तथा बहिष्कार करने वाले लोग अब दंडित हो सकेंगे। सामाजिक रीति-रिवाजों की आड़ लेकर सामाजिक बहिष्कार के मनमाने फरमान जारी करने की प्रथा अब बड़ी सामाजिक कुरीति के रूप में सामने आ गई है। उन्होंने जनजागरण अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों का दौरे में उन्होंने पाया कि छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर कुरीतियां है।

सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे परिवारों को राहत देने के लिए की जा रही कवायद
बहिष्कार के डर से अन्य ग्रामीण नहीं करते मदद
डॉ मिश्र ने कहा बहिष्कृत व्यक्ति को समाज का कोई भी व्यक्ति मदद नहीं कर सकता। क्योंकि मदद करने पर उसको भी समाज से बहिष्कृत होने का खतरा रहता है। ऐसे में चाहकर भी गांव के घनिष्ठ लोग जो बहिष्कृत परिवार के करीबी रहते है, वे भी सामने नहीं आते है बहिष्कृत व्यक्ति को शादी, मृत्यु, पर्व, त्योहार, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम तालाब, नदी के उपयोग से वंचित कर दिया जाता है।

महाराष्ट्र जाकर देखे कैसे पारित हुआ कानून
डॉ दिनेश मिश्र ने बताया कि पिछले हफ्ते वे महाराष्ट्र प्रवास पर थे। वहां विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं से चर्चा की और जानने की कोशिश किए कि किस तरह वहां ये कानून लागू किया गया। महाराष्ट्र में विधानसभा में सभी सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण कानून को बिना किसी विरोध के सर्वसम्मति से 11 अप्रैल 2016 को पारित किया था। 3 जुलाई 2017 से पूरे महाराष्ट्र में लागू कर दिया गया।

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