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कूबड़ निकला तो बड़ा भाई बना छोटे का सहारा, स्कूल से निभा रहा साथ

5 वर्ष पहले
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कुरूद ब्लाक के ग्राम मड़ेली निवासी रोमनलाल सेन, पोलियो जैसी घातक बीमारी के साथ पैदा हुए पीठ और छाती में कूबड़ निकलने से कद 2 फीट से ज्यादा नहीं बढ़ा लेकिन छोटे भाई की इस कमी को दूर करने उनके बड़े भाई चैन सिंह ने 39 सालों से सहारा बने हुए हैं। बचपन में स्कूल जाने से लेकर अब किसी काम से बाजार जाने तक रोमन लाल चैन सिंह की पीठ पर ही जाते हैं। पीठ पर चढ़े रोमन को देख कई लोग हंसते हैं, लेकिन उनकी परेशानी सुन दया भाव आता है। वर्तमान में रोमन स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग या नौकरी की तलाश में सरकारी दफ्तरों में मदद के लिए घूम रहा है। कुरूद से भाई की बाइक पर चढ़कर कलेक्टोरेट पहुंचता है, फिर कोई भी दफ्तर या जहां भी जाना होता है, पीठ पर ही चढ़कर जाता है।

मेरा भाई बोझ नहीं
रोमन बचपन से ऐसा ही है। वह मेरे लिए बोझ नहीं है। मैं बड़े भाई होने का फर्ज निभा रहा हूं। दफ्तरों में मदद के लिए साथ प्रयास कर रहे हैं। चैनसिंह सेन, बड़ा भाई

मदद चाहता है पर आधार नहीं
नि:निशक्तता के कारण ट्रायसिकल चलाने में दिक्कत होती है। बड़े भाई का पीठ मेरे लिए रथ से कम नहीं है। प्रशासन से काम या स्वरोजगार के लिए मदद मांग रहा हूं। जनदर्शन में गया, तो समाज कल्याण भेज दिए, लेकिन यहां भी मेरा कल्याण नहीं हुआ। अधिकारी लोन लेने कहते हैं, लेकिन मेरे पास तो जगह ही नहीं है, कहां दुकान खोलूंगा। अब मंत्री, नेताओं से गुजारिश करूंगा। रोमनलाल सेन, ग्राम मड़ेली

गांव में हाई स्कूल तक ही शिक्षा की व्यवस्था थी, इसलिए भाई सहारा बन गया। हायर सेकेंडरी की सुविधा 3 किमी दूर छाती में थी। इस कारण समस्या को देख उसने 10वीं तक ही पढ़ना उचित समझा। चारों भाईयों में वह सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा है।

नहीं पढ़ पाया 12वीं
पैतृक व्यवसाय को भी मजबूर
हाइट नहीं बढ़ने से मानो उसकी जिंदगी ही दब गई। परेशानी को देख वह शादी नहीं करना चाहता। बचपन में ही पिता का साया उठ गया, मां मायके में रहने लगी। निशक्तता के कारण वह पैतृक व्यवसाय हजामत का कार्य भी नहीं कर पाता। चार भाइयों के परिवार में दो छोटे भाई गांव में हजामत बनाते हैं। भाइयों के नाम मात्र 35 डिसिमिल जमीन है। महंगाई को देख वह भी परिवार का सहारा बनना चाहता है, लेकिन उसे किसी की मदद नहीं मिल रही।

धमतरी। बड़े भाई की पीठ पर इस तरह सवार होकर निकलता है रोमनलाल।

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