पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • शहनाई बजाकर पर्व का किया श्रीगणेश

शहनाई बजाकर पर्व का किया श्रीगणेश

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शहनाईढ़ोल (तुर्री) बाजा का अपना ही महत्व है। यह वाद्य ढ़ोल विगत 52 वर्षो से धर्मनगरी डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी देवी के मंदिर में पूर्ण भक्तिमय भावना के साथ बजाया जा रहा है। नवरात्रि के एक दिन पूर्व यानि 24 सितंबर अमावस्या की रात से यह वाद्य यंत्र बजाया जाता है जिसे सालेकसा निवासी श्याम भाऊ शहनाई के साथ बजाते रहे हंै।

अमावस्या की रात्रि से यह बाजा माता के मंदिर में बजना शुरू है इसी दिन बिरी पूजा भी की गई। यह बिरीपूजा डोंगरगढ़ के भक्त दल्लू राम महोबिया, दीपक उइके बैगा के पुत्र एवं ओमकार महोबिया, रामजीलाल तराने द्वारा सम्पन्न की गई। यह ढ़ोल नौ दिनों तक विधिवत् सुबह और शाम दोनों पहरो की आरती के वक्त बजाया जा रहा है। ज्योति विसर्जन के पूर्व अष्टमी की रात्रि को नगर के बंधनवार करने में इस ढोल शहनाई का बड़ा महत्व होता है। बैगा दल्लूराम महोबिया, दीपक उइके, ओमकार महोबिया, रामजी तराने इस ढ़ोल शहनाई के साथ शहर के विभिन्न मंदिरों को बंधनवार करते हुए रणचंडी मंदिर, कॉलेज रोड स्थित गणदेवता, साड़हा देवता, गोलबाजार स्थित बैगा चौरा, पुराना बस स्टैड स्थित बैगा मंदिर पहुंचते है। इसके बाद पंडरी तालाब खुंटापारा स्थित बैगा हनुमान मंदिर में पूजा करते हुए हरदेव लाल चौक स्थित बैगा चौरा होते हुए दंतेश्वरी मंदिर में पूजा सम्पन्न किया गया। दंतेश्वरी पारा स्थित बैगा निवास के प्रांगण में खप्पर को रखकर सतबहिनी माता की पूजा सम्पन्न करने के पश्चात् पहाड़ो में विराजी माँ बम्लेश्वरी देवी के मंदिर की ओर विसर्जन के लिए प्रस्थान करते है। छिरपानी स्थित हनुमान जी, नागदेवता, दादी माता, बघनीन माता की पूजा करते हुए अंत में माँ बम्लेश्वरी देवी की पूजा सम्पन्न करते हुए विसर्जन के लिए ज्योति कक्ष के ज्योति क्रमांक की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की गई। तत्पश्चात् सपंूर्ण ज्योति कलशों का विसर्जन किया जाता है। ऊपर विराजी माता के मंदिर के ज्योति कलश क्रमांक 1 का विसर्जन बैगाओं के द्वारा ही किया जाता है। इस वक्त ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारी एवं कर्मचारी पूूर्ण भक्ति भाव के साथ अपनी उपस्थित थे।