इंसान को जोड़ती है कला: राकेश
इप्टाडोंगरगढ़ के कलाकारों द्वारा मनोज गुप्ता के नेतृत्व में दुष्यंत कुमार की अमर रचना हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए के गायन के साथ ही विकल्प डोंगरगढ़ के 10वें राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का शुभारंभ मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर प्रांगण में हुआ।
इस अवसर पर दो नाटकों की सफल प्रस्तुति की गई। महोत्सव के उद्घाटन रामलीला जैसे चर्चित नाटक के नाटककार राकेश ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जहां एक और आज की राजनीति इंसान को इंसान से बांटने की साजिश चल रही है ऐसे माहौल में कला और कलाकार की महत्ता और ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि कला इंसान को जोड़ती है।
भारतेंदु नाट्य एकेडमी में पूर्व निदेशक चर्चित फिल्म रंगमंच के अभिनेता शिक्षक युगल किशोर ने इस अवसर पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि डोंगरगढ़ जैसे कस्बे में रंगमंच के प्रति लोगों का स्नेह सराहनीय है। ऐसे आयोजन केवल एक कलाकार को उत्साहित करते हैं बल्कि समाज में स्वास्थ्य मनोरंजन की परंपरा का भी प्रवाह करते हैं। वहीं नाट्य निर्देशिका वेदाजी ने डोंगरगढ़ जैसे कस्बे में नाटकों के प्रति उत्साह की सराहना करते हुए महोत्सव की सफलता की कामना की। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व छात्र पुंज प्रकाश भी उपस्थित थे।
पहली प्रस्तुति अनुकृति रंगमंडल, कानपुर का नाटक बकरी था। सर्वेश्वर दयाल लिखित इस प्रसिद्ध नाटक का निर्देशन डॉ.अमरेंद्र कुमार ने किया था।