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ऐसा उप स्वास्थ्य केंद्र, जो माह में सिर्फ एक ही बार खुलता है

7 वर्ष पहले
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स्वास्थ्यविभाग द्वारा ग्रामीणों को बेहतर उपचार की व्यवस्था का दावा खोखला साबित हो रहा है। क्षेत्र के रामपुर (खातूटोला) में एक ऐसा अस्पताल भी है जो माह में एक बार खुलता है। क्षेत्र के सैकड़ों मरीजों को कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण अब इस मसले को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

डोंगरगढ़ ब्लाक के उप स्वास्थ्य केंद्र में महिला पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता पदस्थ हैं। ये कर्मचारी माह में एक बार आकर अस्पताल खोलते हैं और फिर ताला लगाकर घर लौट जाते हैं। जबकि इस उपस्वास्थ्य केंद्र के भरोसे रामपुर के अलावा कोहलाकसा, कुहीकोड़ा, आंवरटोला आदि गांव आते हैं। इन गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नसीब नहीं हो रही है। माह के पहले मंगलवार में इस अस्पताल का ताला खुलता है। टीकाकरण अन्य कार्य निपटाने के बाद पूरे माह भर अस्पताल को बंद रखा जाता है। विभागीय अधिकारी भी इस केंद्र का जायजा नहीं लेते। इसके चलते कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रही है। टीकाकरण के लिए कर्मचारियों द्वारा शेड्यूल बांध दिया गया है। रामपुर के लिए पहले मंगलवार, कोहलाकसा में दूसरा, कुहीकोड़ा में तीसरा और रानीतलाब में चौथे मंगलवार को टीकाकरण किया जाता है। बाकी दिन दौरे के नाम पर गुमराह किया जाता है।

मरीजों की जान जोखिम में

दवाओं के जला दिया

शासन से मिली दवाओं को अस्पताल परिसर में जला दिया गया है। ये दवाएं कालातीत भी नहीं हुई हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र के पास रहने वाली मितानिन लताबाई का कहना है कि छह माह से उन्हें दवाएं ही नहीं दी गई हैं। इससे मरीजों को दवा बांटने में परेशानी होती है। कुल मिलाकर आसपास के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।

स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के नहीं रहने से झोला छाप डॉक्टरों की चांदी हो गई है। कई बार मरीजों को गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है जिससे लोगों को मजबूरी में ऐसे डाक्टरों से इलाज कराना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने माह में एक दिन उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने ब्लॉक द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र को दी जाने वाली राशि की हिसाब तथा दवाई जलाई जाने की जांच गांव में ग्रामीणों के समक्ष कराने की मांग कलेक्टर से की है। इस संबंध में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता एस कुरैशी से जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो पाई।

डोंगरग