युक्तियुक्तकरण में अनियमितता
विकासखंडमें 222 प्राथमिक 103 पूर्व माध्यमिक शालाओं में पदस्थ शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण में चल रहा अनियमितताओं का खेल अब निर्दोषों को फंसाने में लगा है। राज्य सरकार वर्तमान सत्र को जहां शिक्षा गुणवत्ता वर्ष के रूप में मना रही है।
इसके अंतर्गत शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए विभिन्न शालाओं में कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। मॉनीटरिंग के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि शालाओं में शिक्षकों की कमी अधिकता को सामंजस्य बनाकर दूर करने का प्रयास किया जाए। इसे युक्तियुक्तकरण का नाम देकर कम दर्ज संख्या में पदस्थ अधिक शिक्षकों को अधिक दर्ज संख्या वाली शालाओं में भेजकर सामंजस्य स्थापित किया जा रहा है।
शासन की इस महती योजना को अधिकारियों ने पैसे का खेल बना दिया है। युक्तियुक्तकरण में बड़ी मात्रा में अनियमितता का खेल किया जा रहा है। शिक्षक संघ के सचिव संजय पांडेय के अनुसार बीईओ ने शासन के आदेशों की अवहेलना की है। अपनी गलती पर संकुल प्रभारियों को फंसाने का खेल भी खेल रहे है। राज्य शासन ने तीन आदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला में 30 बच्चों पर एक शिक्षक तथा पूर्व माध्यमिक शाला में 35 बच्चों पर एक शिक्षक पदस्थ होना चाहिए। इस आधार पर युक्तियुक्तकरण का अतिशेष शिक्षकों को उन शालाओं में भेजे जहां शिक्षकों की कमी है।
^हां जांच तो किया गया था। पर इस बारे में अच्छी तरह से फाइल देखकर ही बता पाऊंगा। नोटिस तो बीईओ को भी जारी हुआ है। हमने अपनी रिपोर्ट भेज दी है।\\\'\\\' सीएलमारकंडे, एसडीएमडोंगरगढ़
मनचाहे ढंग से तबादला
खंडशिक्षा कार्यालय ने अपना स्वार्थ साधने के लिए शालाओं की दर्ज संख्या कागजों में बढ़ा दी और अतिशेष शिक्षकों को मनचाहे स्थान पर पदस्थ कर दिया। जांच का विषय उठा तो जून माह में संकुल प्रभारियों के द्वारा किये गए सर्वे में अनुमानित संख्या को आधार बनाकर दोषी ठहरा दिया जबकि ३१ जुलाई को सभी शालाओं में दर्ज संख्या की वास्तविक स्थिति ब्लाक एजुकेशन आफिसर को पहले से मालूम है।
इस तरह की मनमानी
प्राथमिकशाला मुसराकला में 69 की दर्ज संख्या में 4 शिक्षक पदस्थ थे वहां से दो को हटाकर अन्यत्र स्थानांतरण करने के स्थान पर दो और पदस्थ कर दिए गए यानि 69 बच्चों में 4 के स्थान पर शिक्षक पदस्थ है। राका में १९८ की दर्ज संख्या में शिक्षक पहले से पदस्थ