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रेलवे में सूचना के अधिकार का उल्लंघन

6 वर्ष पहले
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डोंगरगढ़विकास मंच के अध्यक्ष केके वर्मा ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों पर सूचना के अधिकार के कानून का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। रेलवे के महाप्रबंधक रेल मंत्रालय को सीधे पत्र लिखकर श्री वर्मा ने इन अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग की है। श्री वर्मा ने बताया कि आम व्यक्ति रेलवे में सूचना के अधिकार का उपयोग यदि करता है तो अधिकारी रटा-रटाया जवाब देकर उसे चलता कर देते है।

वर्मा ने ही इस संबंध में वरिष्ठ मंडल अभियंता दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग को भेजी थी। जिस पर इस विभाग ने उनके आवेदन को यह कहकर वापस लौटा दिया कि आपका पोस्टल आर्डर वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के नाम से होना चाहिए। श्री वर्मा ने फिर भी हार नहीं मानी और सूचना के अधिकार के तहत पुन: उक्त पते पर पोस्टल आर्डर सहित आवेदन भेजा। रेलवे के ही अन्य विभाग से संबंधित जानकारी रेल अधिकारियों ने यह कहकर लौटा दी कि यह उनके विभाग से संबंधित नहीं है।

एकसवाल के दो अलग-अलग जवाब: यहींनहीं रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग रायपुर बिलासपुर से मांगी गई जानकारी में अलग-अलग उत्तर देकर निर्माण से संबंधित जानकारी में भारी अंतर बताया गया है। रायपुर के जनसूचना अधिकारी अनिल कुमार पांडेय ने वॉशिंग लाइन का निर्माण 270 मीटर इसकी लागत 4398 रुपए प्रति मीटर बताई। साथ ही पीट लाइन की लंबाई 67 मीटर लागत 26820 रुपए प्रति मीटर बताई गई। इसी निर्माण की जानकारी बिलासपुर के जनसूचना अधिकारी धन सिंग मीणा पीट लाईन का निर्माण 19896 रुपए प्रति मीटर वॉशिंग लाइन का 16642 रुपए प्रति मीटर बता रहे हैं। जो पीट लाइन दुर्ग में 26820 रुपए प्रति मीटर की लागत में बनी है। बिलासपुर में 19896 रुपए में बन रही है। वहीं वॉशिंग लाइन दुर्ग में 4398 रुपए मीटर में बनाई गई और बिलासपुर में की लागत बताई जा रही। एक ही विभाग के एक ही कार्य के दो अलग-अलग उत्तर दिग्भ्रमित कर रहे।

रेलवे लाइन का सुधार कार्य जारी है।

अफसर ने दो टूक कहा, हमारे विभाग से संबंधित नहींं

डीजलइंजन इलेक्ट्रिक इंजन के संचालन में लागत पर रेलवे के जनसूचना अधिकारी एके गुप्ता ने डीजल इंजन के प्रति किलोमीटर चालन में 160 रुपए खर्च बताया। वहीं विद्युत इंजन के सवाल को यह कहकर टाल दिया कि वह उस विभाग से संबंधित नहीं, बल्कि विद्युत विभाग से है, जबकि नियमानुसार किसी भी विभाग से संबंधित जानकारी के लिए उस विभाग को पत्र लिखकर जनसूचना अधिकार के तहत उपभोक्ता को सूचित करना होता है। किंतु रेल अधिकारी लिखित में टाल-मटोल कर उपभोक्ताओं के सवाल का जवाब देकर उन्हें दिग्भ्रमित कर रहे है साथ ही सूचना के अधिकार का उल्लंघन भी।