पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • रेलवे के माध्यम से कॉरीडोर की स्वीकृति मिलती तो बेहतर: सिंह

रेलवे के माध्यम से कॉरीडोर की स्वीकृति मिलती तो बेहतर: सिंह

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्री सिंह ने बताया कि नए रेल कारीडोर को लेकर राज्य सरकार का कदम स्वागत योग्य है, इससे कवर्धा क्षेत्र में बाक्साइट, आयरन ओर, रेंगाखार एरिया से आयरन ओर, छुईखदान से चूना पत्थर और खैरागढ़ क्षेत्र से औद्योगिक बांस का परिवहन व्यावसायिक रूप से कम लागत में होगा। लेकिन पीपीटी मॉडल के इस और तीन साल पुराने समझौते में आज तक कोई पहल नहीं होने से इस पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं।

भास्कर न्यूज|खैरागढ़

राज्य सरकार के पीपीटी मॉडल पर रेल कारीडोर के समझौते को पूर्व सांसद देवव्रत सिंह ने जनता को भरमाने वाला बताया है। नई दिल्ली से दूरभाष पर श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में तीन नए रेल कारीडोर के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर राज्य सरकार का स्वागत योग्य कदम है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि तीन साल पहले कोरबा, जांजगीर और सरगुजा में भी ऐसा ही समझौता उन्होंने किया था, जिसका आज तक कोई अता पता नहीं है। यदि इस प्रोजेक्ट की रेलवे बोर्ड के माध्यम से स्वीकृति होती तो कामर्शियल सहित पैसेंजर ट्रेन की सुविधा मिलती, लेकिन अब पीपीटी मॉडल में समझौते के कारण उद्योग वालों को ही लाभ मिलेगा।

आठ साल पहले स्वीकृत: पूर्व सांसद श्री सिंह ने बताया कि प्रशासकीय और राजनैतिक रुप से काेई प्रयास नहीं होने के कारण उनके संसदीय कार्यकाल में 2008 में तत्कालीन रेलमंत्री लालूप्रसाद यादव ने बिलासपुर कोटा, मुंगेली, पंडरिया, कवर्धा, सहसपुर लोहारा, गंडई, छुईखदान, खैरागढ़, ठेलकाडीह होते डोंगरगढ़ तक नई रेल लाइन सर्वे के लिए बजट में लगभग 50 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी। दो साल में रेलवे ने कामर्शियल और रैपिड सर्वे में बी प्लस पाजीटिव रिर्पोट और प्लानिंग रेलवे बोर्ड में पेश कर दिया, जिसमें उक्त प्रोजेक्ट को पूरा करने की पूरी गुंजाइश व्यक्त की। रिपोर्ट आयोग को रिफर भी कर दिया।

खबरें और भी हैं...