नए वर्ष में किसान करेंगे बोनस यात्रा
किसानोंकी अस्मिता की लड़ाई के पक्ष में आमरण अनशन पर बैठे सुदेश टीकम के स्वास्थ्य ठीक होने के उपरांत जिलेभर के किसान पुन: जुट रहे हैं। आगामी रणनीतियों को लेकर बैठक भी संपन्न हो गई है। जिसमें जिले भर के किसान प्रतिनिधियों ने बैठक में सम्मिलित होकर धान सत्याग्रह आंदोलन को आगे बढ़ाने की सहमति व्यक्त की है।
बैठक मेंं सरकार द्वारा लिये गये निर्णय 10 क्विंटल प्रति एकड़ की जगह 15 क्विंटल धान खरीदी की समीक्षा की गई। जिसमें कहा गया कि सरकार द्वारा जो निर्णय लिया गया है, वह मात्र किसानों के साथ छल है। लक्ष्य बढ़ाकर लिंकिंग के जरिए वसूली, ऋण वसूली के लिए किया गया है। किसान सेना इस बात को लेकर एतराज कर रहे है कि लिंकिंग के जरिए नहीं, बल्कि किसानों को नगद धान खरीदी होना चाहिए। सेना कहना है कि सरकार पहले किसानों का समर्थन मूल्य पर धान खरीदे। उसके बाद किसानों के कर्ज वसूली करे। लिंकिंग के माध्यम से धान बेचने पर छोटे किसानों को जबरदस्त घाटा होने का अनुमान है।
सेना का कहना है कि एक या दो एकड़ जमीन पर खेती करने वाले किसानों के हाथ लिंकिंग के माध्यम से धान बेचने के बाद 4-6 हजार रुपए से अधिक नहीं आएंगे। ऐसे में वह अपना परिवार कैसे चला पाएंगे? वहीं बड़े किसानों को भी लिंकिंग के माध्यम से नुकसान हो रहा है, बड़े किसानों के पास तमाम सिंचाई सुविधा होने के कारण उत्पादन 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ है तक है। ऐसे में सरकार लिंकिंग के माध्यम से 15 क्विंटल प्रति एकड़ धान लेकर अपना कर्ज वसूल लेगी। जिससे केवल लागत वसूलेंगे।
बीमा के नाम पर काट रहे पैसा
साथही बैठक में किसानों ने निर्णय लिया कि दिसंबर अंत तक किसानी कार्य समेटने के पश्चात तेज गति से गांव-गांव में किसान सेना का गठन लगातार जारी है। इसके लिए नेटवर्किंग पद्धति भी अपनाई गई है। बोनस यात्रा के दौरान किसान विरोधी नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने का कार्य किया जायेगा। किसान सेना के जिला संयोजक धरमपाल खोब्रागढ़े, गेंदलाल देवांगन ने बताया कि इसमें कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
इधर गांव-गांव में बैठक की तैयारी
बैठकमें सभी किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि गांव-गांव में बैठक कर बोनस यात्रा को सुचारू रूप से चलाया जा सके, इसकी रणनीति बनायी गई है। मानपुर-मोहला, गंडई, मुढ़ीपार, बोरतलाव, चिचोला सहित जिले भर के चारों दिशाओं से ब