सुंदर की प्रस्तुति के साथ हुआ समापन
इप्टाभिलाई की प्रस्तुति सुंदर के साथ ही 9 फरवरी को तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्योत्सव का समापन हो गया। प्रस्तुति अपने नाम के अनुरूप ही सहज और सुंदर थी। मोहित चट्टोपाध्याय लिखित और रणदीप चट्टोपाध्याय अनुदित यह नाटक सौंदर्य का आंतरिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है और इस तर्क को स्थापित करती है कि खूबसूरती शारीरिक नही बल्कि एक आंतरिक विषय है।
प्रस्तुति में राजेश श्रीवास्तव, रूचि गोखले, अनिल, सुभाष, मुदृलि आदि अभिनेताओं ने अभिनय किया। इस नाटक का निर्देशन निशु पांडे ने किया था। प्रस्तुति इस बात पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है कि गंभीर नाटकों को दर्शक पसंद नही करते? उपस्थित दर्शकों की शांति और प्रस्तुति के उपरांत खड़े होकर लंबे समय तक ताली बजातेे रहना इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कलाप्रेमी जनमानस गंभीर नाटकों के प्रति भी संवेदनशील है बशर्ते प्रस्तुति के कथ्य और प्रदर्शन में दर्शकों तक संप्रेषित होने का दम हो।
तीन दिवसीय नाट्य समारोह के दौरान कलाकारों ने दी प्रस्तुति।
मशाल से हुई शुरुआत
इप्टाडोंगरगढ़ के कलाकारों ने जनगीतों के गायन के पश्चात मारवा थियेटर पुणे की एकल प्रस्तुति ले मशालें नामक नाटक से अंतिम दिन के नाट्योत्सव की शुरूआत हुई। इरोम शर्मिला और मणिपुर को विषय बनाकर निर्देशिका ओजस एस वी ने अपने निर्देशन में एक यादगार प्रस्तुति रची है जिसे अभिनेत्री रेखा ठाकुर ने अपने अभिनय के द्वारा जीवंत किया। प्रस्तुति केवल इरोम की सच्चाई को सामने रखती है बल्कि भारत के नक्शे पर विद्वान मणिपुर नामक राज्य की स्मिता और संस्कृति राज्य केंद्रित हिंसा की भी झलक प्रस्तुत करती है। मणिपुर की नंगी सच्चाई देखकर लोगों के आंखों में आंसू गये। दर्शक के लिए यह यकीन करना सहज नही था।
नाट्य समारोह