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सेल्फ डिफेंस के लिए छात्राएं सीख रहीं कराते के गुर, जीते 63 मेडल

5 वर्ष पहले
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आत्मरक्षा के लिए प्रसिद्ध मार्शल आर्ट को अब क्षेत्र की लड़कियां भी सीख रही है। इन्हें सिखाने का बीड़ा इंटरनेशनल मार्शल आर्ट प्लेयर राहुल शर्मा ने उठाया है। मार्शल आर्ट खेल के साथ-साथ सेल्फ डिफेंस के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है। इसी वजह से मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने छात्राएं विशेष रूचि दिखा रही है, क्योंकि इसे खेल के साथ-साथ आपातकाल या विकट परिस्थिति में स्वयं की रक्षा कैसे करनी है यह भी छात्राओं को विशेष रूप से ट्रेनिंग दौरान सिखाया जाता है। अब तक मार्शल आ‌र्ट्स में राज्य और जिले स्तर पर छात्राओं ने 63 मैडल भी जीत चुकी है।

बताया गया कि मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग के लिए शासकीय व प्राइवेट स्कूल के छात्र-छात्राएं प्रतिदिन सुबह व शाम दो-दो घंटे मैदान में पसीना बहा रहे है। खास बात यह भी है कि ट्रेनिंग लेने के लिए शासकीय स्कूल की छात्राएं भी आगे आ रही है। ट्रेनिंग लेने के बाद छात्राएं स्वयं के सुरक्षा के प्रति आत्मविश्वासी भी हो रही है तथा दूसरों को भी प्रेरित करने का काम कर रही है। डोंगरगढ़ निवासी इंटरनेशनल मार्शल आर्ट प्लेयर राहुल शर्मा शहर व आसपास गांव के छात्र-छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग निशुल्क दे रहे है।

राहुल ने बताया कि प्रतिदिन ३५ बच्चों को वे प्रशिक्षण देते हैं। सुबह साढ़े 5 से साढ़े 7 बजे तक तथा शाम 5 से 7 बजे तक दो-दो घंटे ट्रेनिंग दिया जाता है। वर्तमान में इन्हें रेलवे ग्राउंड में ट्रेन किया जाता है। इन्हें प्रशिक्षित कर प्रतियोगिताओं में भी बच्चे जौहर दिखाते हैं।

छात्राएं ट्रेनिंग लेेने के बाद दूसरों को कर रहे प्रेरित
डोंगरगढ़। मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग के दौरान नगर की छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर भी सिखाएं जाते हैं।

स्वयं की सुरक्षा के लिए छात्राओं का बढ़े आत्मविश्वास

हमारी मंशा है कि खेल के साथ-साथ बालिकाएं स्वयं की सुरक्षा के लिए आत्मविश्वासी बनें। इसे हम छग में डेवलप करना चाहते है। इसके लिए हमें स्थान की आवश्यकता है। सरकार इसके लिए कदम उठा सकती है। ट्रेनिंग देने का क्रम जारी रहेगा। राहुल शर्मा, इंटरनेशनल प्लेयर

ट्रेनिंग पाने के बाद प्रदर्शन
ट्रेनिंग बाद प्रशिक्षित बच्चों ने राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तर में आयोजित होने वाले मार्शल आर्ट गेम्स में भाग भी लिया। उसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गोल्ड सहित कुल 63 मैडल भी जीतकर आए। मार्शल आर्ट के बच्चों ने नेशनल में 15, स्टेट में 30 तथा जिला स्तर पर 18 मैडल अपने नाम किया है। राहुल ने स्वयं मार्शल आर्ट इंटरनेशनल गेम्स में लगातार दो बार गोल्ड मैडल जिसमें पहला थाईलैंड व दूसरा मुंबई में जीता है।

मार्शल आर्ट में यह शामिल
मार्शल आर्ट में वुशू, किक बॉक्सिंग, ताइक्वांडो, ताइंगसूडो, मुथाई, मॉयबॉन, जीतकांडो, सिली बम, थान थाम शामिल हैं। इसे खेल के साथ-साथ सेल्फ डिफेंस में भी उपयोग किया जाता है। ट्रेनिंग में व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ आत्म विश्वास को जागृत करने, आत्मरक्षा के गुर सिखाने सहित विभिन्न खेलों में पारंगत करने के साथ-साथ स्वास्थ्य तथा कॅरियर को लेकर युवा भी इससे जुड़ रहे है।

160 छात्रों को दी ट्रेनिंग
राहुल कनक मार्शल आर्ट एकेडमी भी संचालित कर रहे हैं। इसमें उनके साथ सहयोगी प्रशिक्षक नितेश सिन्हा, हर्षदीप कक्कड़, प्रियंका भिवगड़े भी है। उन्होंने एलबी नगर में 84, नेहरू कॉलेज डोंगरगढ़ में 36 व रेलवे ग्राउंड में कैंप आयोजित कर 40 छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी है। स्वयं की रक्षा के लिए प्रैक्टिस भी कर रही है। राहुल शर्मा इसके अलावा हरियाणा में 400 छात्रों को प्रशिक्षण भी देकर आ चुके है।

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