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पूजा का एकमात्र लक्ष्य है मोक्ष सुख : स्नेहयशा

7 वर्ष पहले
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जैनसाध्वी स्नेहयशा श्रीजी मसा ने मंगलवार को प्रवचन देते कहा कि हमारे प्रबल पुण्य का उदय है कि हमें परमात्मा की वाणी सुनने का अवसर मिला है। हम इस वाणी को बरसों से सुनते चले रहे हैं।

प्रश्न यह है कि ये परमात्म वाणी हमारे जीवन में कितनी उतरी है। कई बार व्यक्ति मनुष्य आकृति, मानव जीवन जिनशासन जैसी धरोहर प्राप्त होने पर, धर्म से जुड़ने पर भी अपनी आदतों से बाज नहीं आता। हमारी आराधना का एकमात्र लक्ष्य मोक्ष सुख है। पर कुछ लोग ऐसे हैं जो ऐसी-ऐसी साधना करते हैं जिनसे उन्हें नरक प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति दूसरों की बढ़ोतरी उन्नति से ईर्ष्या करने लगता है और उसे नीचा करने के लिए कई कुकृत्यों को अपने भीतर बसा लेता है। एक मां भी अपने लोभ के वश में अपनी वासनाओं के लिए अपने बेटे को संसार से विदा कर देती है। कई गुंडागर्दी से करते हैं तो कई गलत विधाओं का प्रयोग करके करते हैं। पाप का घड़ा फूटे बिना नहीं रहता। पाप का फल व्यक्ति को भोगना ही पड़ता है।

गलत विधाओं का सहारा लेने वाले सज्जनों को भी नहीं छोड़ते और दुर्जनों को भी नहीं छोड़ते। कर्म कभी किसी को नहीं छोड़ता। चाहे वो भगवान बनने वाले हो या हैवान बनने वाले। व्यक्ति यहां कितनी भी उपलब्धि प्राप्त कर ले पर उसे कर्ज सत्ता के सामने झुकना ही पड़ता है।