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बालोद जिले में 5 की जगह हो जाएंगे 7 ब्लॉक, शासन को भेजा प्रस्ताव

7 वर्ष पहले
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बालोदजिले में ब्लॉकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। नए ब्लॉकों के गठन के लिए शासकीय प्रक्रिया चल रही है। ब्लॉक एवं जिला स्तर पर ब्लॉक गठन का कार्य हो चुका है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए राज्य स्तर पर रिपोर्ट मई माह में भेजे गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य स्तर पर गठन प्रक्रिया चल रही है।

माना जा रहा है कि नगरीय निकाय त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद नए ब्लॉकों की घोषणा की जाएगी। वर्तमान में जिले में पांच ब्लॉक बालोद, गुरूर, डौंडीलोहारा, गुंडरदेही और डौंडी है। मई माह में ब्लॉक पुनर्गठन आयोग ने जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर विचार कर जिले में दो नए ब्लॉक के गठन का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसे राज्य स्तर पर भेजा गया है। अब प्रस्ताव पर मुहर लगने की देर है। इसके बाद जिले में ब्लॉकों की संख्या 7 हो जाएगी। संभागीय स्तर पर हुई जनसुनवाई में बालोद जिले के अर्जुन्दा देवरी को नए ब्लॉक का दर्जा दिए जाने पर प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन अभी तक घोषणा नहीं हो पाई है।

प्रस्तावितसूची में 8 जगह : 2013जून माह में हुए जनसुनवाई में बालोद जिले से आठ जगहों को प्रस्तावित सूची में डाला गया था। जिसमें अर्जुन्दा, देवरीबंगला, बेलौदा, निपानी, बड़भूम, कुसुमकसा, रेंगाडबरी, खेरथाबाजार शामिल था। लेकिन इसमें से सिर्फ दो अर्जुन्दा एवं देवरी को आगे प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया। जनसुनवाई के बाद अनुशंसा के साथ विभाग अपनी रिपोर्ट बनाकर शासन को सौंपेंगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शासन स्तर पर होगी।

हर ब्लॉक में होगा जपं का मुख्यालय

हरब्लॉक में जनपद पंचायत का मुख्यालय भी होगा। एक जनपद पंचायत में कितने ग्राम पंचायत आएंगे। इसके लिए मैदानी क्षेत्र सुदूर आदिवासी क्षेत्र के लिए मापदंड अलग-अलग है। मैदानी क्षेत्र के लिए ग्राम पंचायत 50 से अधिक नहीं होना चाहिए। जनसंख्या का भी आंकलन किया जाएगा। एक पंचायत की औसतन आबादी दो हजार के हिसाब से 50 पंचायतों की आबादी एक लाख होती है। एक जनपद में अधिकतम एक लाख की आबादी होगी। आदिवासी क्षेत्र के लिए यह नियम लागू नहीं है। उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर ब्लॉक तय किया जाएगा।

2013 से चल रही है पुनर्गठन की प्रक्रिया

नयाब्लॉक बनाने के लिए 21 जून 2013 को विकासखंड पुनर्गठन आयोग ने पांच जिले