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वरघोड़ा में गूंजे मंगल गीत जयकारे

7 वर्ष पहले
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तपआराधकों का अभिनंदन करने के लिए जैन समाज ने रविवार को वरघोड़ा (शोभायात्रा) निकाली। जिनालय जैन मंदिर से निकली शोभायात्रा में भगवान के रथ के सामने श्रद्धालु दूध मिश्रित जल से धरती को अतिपावन करते आगे-आगे चल रहे थे। श्रद्धालु चंवर भी डूला रहे थे। पीछे-पीछे देवी स्वरुपा जैन, साध्वी स्नेहयशा श्रीजी मसा, र|निधि मसा, यशोनिधि श्रीजी मसा सिद्धांतनिधि जी मसा अपने श्रद्धालु भक्तों के साथ-साथ चल रही थीं। शोभायात्रा के पीछे में रथयुक्त बग्घी में सारे तप आराधक एक के बाद एक सवार होकर चल रहे थे। इन तप आराधकों ने उत्कृष्ठ तप किया है। जिसकी बदौलत तप अनुमोदना उत्कृष्ठ महोत्सव का सुयोग नगर को मिला। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होते वापस जैन मंदिर पहुंची।

जुलूस की आगुवानी करते नगर के बच्चे जैन धर्म ध्वजा को लेकर आगे-आगे चल रहे थे। इस दौरान विभिन्न जयकारे लगाते मंगल गीत गाए। वहीं युवा मंडल, बालिका मंडल, महिला मंडल सहित बाहर के श्रद्धालु भी शामिल हुए। युवा के साथ बुजुर्ग भी शोभायात्रा में अपने आपको थिरकने से रोक नहीं पाए। बालिकाएं महिलाएं भी विभिन्न धार्मिक गीतों पर झूम उठी।

आराधकभी झूम उठे

संपूर्णनगर भ्रमण के बाद शोभायात्रा जैसे ही विवेकानंद चौक पहुंची, समस्त तप आराधकों को बग्घी रथ से उतार पैदल ही मुख्य सदर मार्ग से मंदिर तक लाया गया। जहां जगह-जगह केशर इत्र की वर्षा कर संपूर्ण वातावरण को पावन किया गया। लोगों ने कुमकुम से तिलक कर उनका अभिनंदन किया। जैन मंदिर पहुंचते-पहुंचते सारे तप आराधक जैन मंदिर के समीप झूमने लगे। वे ईश्वर परमात्मा के प्रति अपने भक्ति प्रदर्शित कर रहे थे।

शरीरको तपाने के बाद पावन होती है आत्मा

सुबहधर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन साध्वी स्नेहयशा मसा ने कहा कि जैन शासन का हर एक व्रत कठिन है, परंतु इन व्रतों के माध्यम से शरीर को तपा कर आत्मा को पावन पल्लवित किया जाता है। व्रत ऐसे होते है कि वो शब्द बड़े बड़ों के लिए कठिन हो जाए पर प्रभु भक्ति के साथ छोटी-छोटी उम्र वालों ने भी कर दिखाया। नगर में हुई पंचपरमेष्ठी श्रेणी तप, मासक्षमण, अठाई तेले बेले करने वाले अराधक साधु वाद के पात्र है, जिन्होंने अपने जिम्हा पर ताला लगाकर उत्कृष्ठ साधना आराधना किया। सबसे बड़ा संयम जीभ का संयम होता है। चाहे खाने में हो या बोलने में इस पर जिसने विजय पाली तो समझिए बेड़ा पार