- Hindi News
- मोक्ष को प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा है कषाय : स्नेहयशा
मोक्ष को प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा है कषाय : स्नेहयशा
श्रीकुशलनिपुणा अतिथि गृह में जैन साध्वी स्नेहयशा मसा ने गुरुवार को प्रवचन देते कहा कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने अर्थात मोक्ष मंजिल को प्राप्त करने के लिए सबसे बड़ा बाधक तत्व कषाय है संसार में जितने भी जीव है, सभी जीव माया नहीं कर सकता हैं।
क्रोध, लोभ मान कर सकते हैं। छोटा बच्चा भी क्रोध, मान लोभ कर सकता है, पर माया नहीं कर सकता, क्योंकि माया करने के लिए बुद्धि, होशियारी चतुराई की आवश्यकता होती है, जो मायावी होते है, उनके मन में जो होता है, वह कहता नहीं और जो कहता है वह करता नहीं। मायावी को शहद लगी उस धार के समान बनाया है जो मीठे व्यवहार से विश्वास जगाकर विश्वासघास करता है।
उन्होंने कहा कि क्रोध, लोभ, मान को नाग की उपमा दी गई है, किंतु माया को नागीन की उपमा दी है। नाग काटे तो आदमी जीवित रह सकता है, परंतु नागिन काटे तो फिर उसका कोई उपाय नहीं होता। जो मायावी होता है वह बार-बार जन्म लेता है, किसी भी साधना जप, तप कर ले उसका संसार परिभ्रमण कभी समाप्त नहीं होता। आज कल अच्छे माल के नाम से हल्के माल का उपयोग किया जाता है। असली को असली कहने वाला आज मुर्ख माना जाता है और जो नकली को असली बताकर बेचता है उसे होशियार माना जाता है। लोगों की मानसिकता बन गई है कि अनीति किए बिना धन प्राप्त नहीं होता, जो दूसरों को रुला-रुलाकर धन को इकट्ठा (संग्रह) करता है, उसका धन चोर डाकू उड़ा ले जाते हैं। सरकार छापा लगा देती है या बीमारियों के इलाज में व्यक्ति का सारा धन निकल जाता है।
मायावी से कोई नहीं करता दोस्ती
महासतीजी ने कहा कि जिस प्रकार धागे में गांठ आने के साथ ही जैसे सिलाई मशीन खड़खड़ाने लगती है, उसी प्रकार हृदय में व्यक्ति के जीवन में माया के प्रवेश होने से विकास की गति रुक जाती है। माया करने से मनुष्य एक बार तो लाभ उठा सकता है, बार-बार नहीं। मायावी से कोई भी व्यक्ति दोस्ती करना पसंद नहीं करता। मोक्ष प्राप्ति के चार मार्ग बतलाए गए हैं, दान, शील, तप भाव। दान देने से दोनों पक्ष को लाभ होता है, जिसे दिया जाता है, उसका संकट दूर होता है और जो देता है उसे आत्मिक शांति प्राप्ति होती है। मनुष्य जन्म हो प्राप्त हुआ है, सार्थक बनाने के लिए इसलिए कषायों का त्याग करें अधिकाधिक दान का मानस बनाएं। जिस प्रकार जल की शोभा कमल से कमल की शोभा जल से होती है, उसी प्रकार हाथों की शोभा दान से होती है।