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आयुर्वेदिक अस्पताल में नहीं मिल रही सुविधाएं

6 वर्ष पहले
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जिले में अव्यवस्था के बीच संचालित हो रहे हैं 44 आयुर्वेदिक अस्पताल

भास्करन्यूज|बालोद

जिलेमें आयुर्वेदिक अस्पतालों की कमी नहीं है लेकिन देखरेख, सामग्री, मशीनों की व्यवस्था, पर्याप्त स्टाफ नहीं होने अन्य कारणों से नागरिक इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। लिहाजा आयुर्वेदिक अस्पताल शोपीस साबित हो रहा है। लोगों को इसका लाभ मिल सकता है, अगर विभागीय अधिकारी शासन इस ओर ध्यान दें। आयुर्वेद अस्पताल का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों को निजी डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ रहा है। सुविधा नहीं मिलने से दूसरे जगह पर इलाज के लिए लंबी दूरी तय करना पड़ रहा है। शासन को इस दिशा में पहल करने की आवश्यकता है। ताकि ग्रामीणों का इसका लाभ मिल सकें।

जिले में लगभग 44 आयुर्वेदिक अस्पताल है। लेकिन अधिकांश अस्पतालों में एक दिन में 5-10 मरीज आना भी मुश्किल है। सुविधाओं की कमी और पर्याप्त स्टाफ नहीं होना इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। लोगों के इलाज सुविधा के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल तो खाेले गए है। लेकिन इन अस्पतालों में मशीन का अभाव अब तक बना हुआ है। पर्याप्त सुविधा नहीं हाेने से मरीज भी यहां इलाज कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाते है। शासन द्वारा लगभग 20-25 साल से ग्रामीण इलाकों में आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित की है। लेकिन आज भी वहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है।

अस्पताल में दवाइयां तो है पर मशीनें नहीं है।

नेवारीकला का शासकीय आयुर्वेदिक अस्पताल।

अस्पतालों में नहीं है पर्याप्त मशीनें

आयुर्वेदअस्पतालों में अब तक पर्याप्त मशीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। कई अस्पतालों में जगह की कमी बनी हुई है। यहां गोलियों के स्टाक के साथ सिर्फ कान दांत जांच करने की मशीनें उपलब्ध है। सिकाई मालिश करने के लिए मशीनें नहीं है। ये सुविधाएं सिर्फ बालोद शहर के आयुष पंचकर्म सेंटर (अस्पताल) में है। यदि मरीजों को बड़ी बीमारी हो तो गांव के आयुर्वेदिक अस्पताल को छोड़कर उन्हें बालोद आना पड़ता है। जिला मुख्यालय में सुविधाएं उपलब्ध है लेकिन ग्रामीण अंचल के लोग लंबी दूरी होने की वजह से नहीं आना नहीं चाहते।

अनुपयोगी साबित हो रहे अस्पताल

आयुर्वेदिकअस्पतालों की देखरेख नहीं होने से ग्रामीणों के लिए यह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। जिले के कई गांवों में आयुर्वेदिक औषधालय के लिए खुद का भवन नहीं है। सुविधा के अभाव में ग्रामीण रुचि नहीं ले रहे हैं। बालोद ब्लॉक में ग्राम करहीभदर, निपानी, नेवारीकला बिरेतरा, डौंडीलोहारा ब्लॉक में मालीघोरी, अर्जुन्दा ब्लॉक में कमरौद, गुंडरदेही ब्लॉक के सिकोसा, हल्दी, डौंडी ब्लॉक के घोटिया में आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हो रही है। शासन ने इन अस्पतालों के लिए सिर्फ एक डाक्टर का पद स्वीकृत किया है और उसी के भरोसे ये केन्द्र संचालित हो रहे हैं। कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट ही नहीं है।

भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है

^आयुर्वेदअस्पतालों में मरीजों का रुझान पहले की अपेक्षा अब बढ़ रहा है। जागरूकता के अभाव में कई मरीज आयुर्वेद अस्पताल में इलाज कराना नहीं चाहते। शासन की ओर से मरीजों को सभी सुविधाएं दी जा रही है। स्टाफ की कमी है लेकिन ग्रामीणों का इलाज समय पर हो रहा है। शिविर आयोजित कर आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार किया जाता है। नए भवन के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलने पर ही नया आयुर्वेदिक भवन बनाया जाएगा।” एमएनयोगी, नोडल अधिकारी, आयुर्वेद विभाग, बालोद