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249 गांवों में गहराया पेयजल संकट गर्मी में समस्या से निपटने की चुनौती

5 वर्ष पहले
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फरवरी की शुरुआत में ही जिले के 249 गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। इसका कारण कम बारिश को माना जा रहा है। इस बार पेयजल समस्या से निपटना ग्रामीणों व अफसरों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। अफसर भी स्वीकार कर रहे है कि 2015 में बारिश कम होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या गंभीर बनी हुई है।

पीएचई सर्वे कर ग्रीष्म ऋतु में जलस्तर नीचे जाने की समस्या से ग्रस्त गांवों को चिह्नांकित कर रही है। साथ ही पेयजल समस्या निराकरण के लिए विभिन्न बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दो दिन के अंदर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।

सर्वे रिपोर्ट में विभिन्न चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। जिले के गुरुर ब्लॉक में स्थिति ज्यादा गंभीर है। वहीं बालोद, डौंडीलोहारा व डौंडी ब्लॉक में भी 40 से अधिक गांव में पेयजल संकट है। रिपोर्ट की मानें तो सूखे की मार झेल रहे जिले के लोगों को अब दो बूंद पानी के लिए भी मशक्कत करना पड़ेगा, क्योंकि पेयजल स्त्रोत भी सूखने के कगार पर है।

गांवों में तालाब, जलाशय, नदी, नाले सब सूख रहे

क्षेत्र के ओरमा, बघमरा, पर्रेगुडा, लाटाबोड़, खपरी, मेड़की, खरथुली, भोथली सहित अन्य गांवों में तालाब, जलाशय सूखने की कगार पर है। साथ ही इन गांव से लगे नदी, नाले में भी पानी नहीं है। वहीं आने वाले दिनों में भी हैंडपंप से पानी निकलना बंद हो जाएगा। सूखे की स्थिति के सामने आने के बाद पीएचई ने जिले भर के गांवों में सर्वे कराया है। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में निस्तारी की भयंकर संकट गहराएगा। पिछले माह पीएचई के उच्च अधिकारी भी बालोद पहुंचकर जिले में पेयजल स्थिति के संबंध में कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों से चर्चा किए थे।

गांव के बड़ें जलाशयों में नहीं हो पाया पानी का भराव
कम बारिश के कारण जिले के जलाशयों में जल भराव नहीं हुआ है। इसका कारण जिले की प्रमुख जलाशय तांदुला और गोंदली जलाशय का जलस्तर घटना है। अभी से जिले के गांवों में तालाब और जलाशय सूखने लगे हैं। वहीं अब तक निस्तारी के लिए पानी छोड़े जाने के लिए सहमति नहीं बन पाई है। ऐसी स्थिति में गर्मी के दिनों में जल संकट से निपटना जिला प्रशासन के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। बारिश नहीं होने से जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। हालांकि विभागीय अफसर सर्वे में इसका खुलासा नहीं कर रहे है।

वर्तमान में 27 से 29 मीटर तक नीचे गया जलस्तर
जिले के चिह्नांकित गांव में जलस्तर अभी 27 से 29 मीटर तक नीचे चला गया है, जबकि यह 20 से 21 मीटर होना चाहिए। टीम के अनुसार जलस्तर गिरने का क्रम तेजी से जारी है। अनुमान है कि दो माह बाद इन क्षेत्रों में लगे हैंडपंप व बोर पानी देना बंद कर देंगे। इसके बाद यहां के लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा। वर्तमान समय में भी यहां पानी के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।

सीमेंटीकरण कर डबरी में पानी किया जाएगा स्टोर
सूखे की स्थिति से निपटने पीएचई ने तालाबों में डबरी निर्माण करने की योजना बनाई है। अधिकारियों ने बताया कि तालाब के बीच में सीमेंटीकरण कर डबरी में पानी स्टोर किया जाएगा। ताकि तालाब के पानी को गर्मी में सूखने से बचाया जा सके। गांवों में बोर के माध्यम से जल भराव किया जाता है लेकिन पानी सूख जाता है। डबरी निर्माण कर पानी स्टोरेज करने से बहुत हद तक राहत मिलेगी।

बालोद, डौंडीलोहारा व डौंडी ब्लॉक में 40 से अधिक गांव में पेयजल समस्या
दो दिन में भेजी जाएगी अंतिम रिपोर्ट
सर्वे के आधार पर गर्मी में जलस्तर नीचे जाने की समस्या से ग्रस्त 249 गांवों में पेयजल संकट निदान के लिए प्रस्तावित कार्यों की सूची तैयार हो चुकी है। साथ ही प्रस्तावित कार्यों में अनुमानित लागत 6 करोड़ 48 लाख 25 हजार रुपए तय किए है। अंतिम रिपोर्ट 2 दिनों में शासन को भेजी जाएगी। आरके शुक्ला, ईई, पीएचई, बालोद

इन गांव में पेयजल संकट व निराकरण के लिए अनुमानित राशि व्यय होगी
बालोद ब्लॉक के 45 गांव चिह्नांकित, अनुमानित एक करोड़ 12 लाख 45 हजार रुपए खर्च होंगे - परसदा, धौराभाटा, तरौद, खेरथाडीह, दैहान, अमलीडीह, मेड़की, देवीनवागांव, अरौद, भोईनापार, परसाही, खपरी, बोरी, लोंडी, बिरेतरा, पीपरछेड़ी, निपानी, तमोरा, नागाडबरी, लिमोरा, मुजगहन, भेड़िया नवागांव सहित 45 गांव को चिह्नांकित किया गया है।

गुरुर ब्लॉक के 88 गांव में 2 करोड़ 35 लाख 60 हजार रुपए खर्च होंगे। अरमरीकला, डोटोपार, हसदा, भिरई, सनौद, ओझागहन, पड़कीभाट, मोहारा, जेवरतला, मुडपार, बासीन, गंगोरीपार, तितुरगहन, सांगली, कंवर, देवकोट, पेंडरवानी, परसुली, ढाडरी, भानपुरी, सुर्रा, सोहपुर, पेवरों, घोघोपुरी सहित 88 गांव चिन्हांकित।

डौंडी ब्लॉक के 40 गांव, एक करोड़ 4 लाख 40 हजार। प्रभावित गांव सिंगनवाही, लिमाडडीह, कांडे, ककरेल, बकलीटोला सहित 40 गांव चिह्नांकित किए गए है।

डौंडीलोहारा ब्लॉक के 58 गांव, एक करोड़ 52 लाख 10 हजार रुपए खर्च होंगे। प्रभावित गांव कसही, मुढ़िया, भीमकन्हार, फरदडीह, जोगीभाट, पापरा, कसही, मड़वापथरा सहित 58 गांव चिह्नांकित किए गए है।

गुंडरदेही के 18 गांव, 43 लाख 70 हजार खर्च होंगे प्रभावित गांव बोरगहन, कजराबांधा, बिरेतरा, बरबसपुर, हिरूखपरी, ओड़ारसंकरी, मोहंदीपाट सहित 18 गांव चिन्हांकित किए गए है।

टीम ने सर्वे रिपोर्ट के साथ ही सूखाग्रस्त की ओर बढ़ रहे इन क्षेत्रों में पानी की कमी दूर करने के लिए कूप गहरीकरण, नलकूप सफाई, नए नलकूप का खनन, हैंडपंप, हैंडपंप के स्थान पर सिंगलफेस पंप, हैंडपंपों के राइजर पाइप में इजाफा, पेयजल परिवहन, नलजल योजना आदि को शामिल करने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समय रहते यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो देर होने पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगा।

टीम ने पानी की कमी दूर करने बताए उपाय
बोर और पाइप लाइन से तालाबों को भरने की तैयारी
हैंडपंप सूखने के कगार पर है। पीएचई विभाग द्वारा अब इन गांवों में बोर व पाइप लाइन के माध्यम से तालाब और जलाशयों को भरने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा पेयजल समस्या को दूर करने अन्य कवायद की जा रही है। पीएचई ने इसके लिए प्रपोजल तैयार कर राज्य शासन को भेजा है। जिसमें 6 करोड़ 48 लाख 25 हजार रुपए की मांग है।

बालोद। सूखे का असर दिखने लगा है। तालाब का पानी अभी से कम व गंदा हो गया है।

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