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मिश्रीलाल ने ली संथारा संलेखना

5 वर्ष पहले
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डौंडीलोहारा|ग्राम अछोली के सुश्रावक मिश्रीलाल राखेचा (81) का शनिवार को सुबह 8.15 बजे संलेखना संथारा सहित पंडित मरण प्राप्त हुई। जैन धर्म में इस तरह संथारा संलेखना देह त्याग का बड़ा ही महत्व है। भाग्यशाली लोगों को ही इसकी प्राप्ति होती है। साधु वेशभूषा में उनके अंतिम यात्रा निकाली गई। धार्मिक उदघोष के साथ अंतिम विदाई दी गई। वे मूलत: राजस्थान के जोधपुर जिले के दशानिया गांव से थे। उनका जीवन शुरू से ही धार्मिक विचारों से ओत-प्रोत रहा। अंतिम समय में भी वे जैन धर्म के 24 तीर्थकरों की स्तुति में लीन रहे। संथारा संलेखना का मतलब संसार के सारी चीजों के त्याग का प्रतिज्ञा करना है। इस प्रार्थना के बाद व्यक्ति खाना पीना सहित विभिन्न परिग्रहों का त्याग कर देता है। प्रभु भक्ति तथा परमात्मा की अराधना करते हुए देह का त्याग कर आत्मा को सदगति की ओर अग्रसर करता है।

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