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अंधी दौड़ में भाग रहा है हर व्यक्ति : स्नेहयशा
जैनसाध्वी स्नेहयशा श्रीजी मसा ने प्रवचन सभा अपने आध्यात्मिक दिल को छू लेने वाले उद्बोधन में कहा कि आज वर्तमान जगत में प्रत्येक व्यक्ति अंधी दौड़ में लगा हुआ है, सभी को स्टैंडर्ड स्टेट्स चाहिए और इसको बढ़ाने के लिए व्यक्ति नानवेज होटल, नानवेज खाना बीयर बारों में जाकर शराब आदि सेवन करने में उन्हें किसी भी तरह का भय नहीं होता है और ही उनके हाथ कांपते और ही उनके अंदर अंतरात्मा में कंपन होती है।
साध्वी स्नेहयशा ने आगे कहा कि स्टैंडर्ड को बनाए रखने के लिए बच्चों को हाई से हाई स्टैंडर्ड की स्कूलों में भेजते हैं। हम स्कूल के स्टैंडर्ड का आंकलन मात्र उसकी फीस और उसके नाम के आधार पर ही करते है। शिक्षक और शिक्षा के आधार पर नहीं। पहले के समय में शिक्षक और शिक्षा कैसी है, ये देखा जाता या आज तो स्कूलों में स्टैंडर्ड के नाम पर होता, क्योंकि पिता के शेयर मार्केट और मां को किटी पार्टी से फुर्सत नहीं है। लड़की से हर कोई प्रश्न करता है कि कहां जा रही हो, कब आओगी, किसके साथ जा रही हो। इतनी देर क्यों हो गई आदि-आदि पर क्या कभी ये प्रश्न बेटे से किया जाता है? नहीं। आखिर क्यों? गलती तो बेटे से भी हो सकती है। पर प्रश्न उससे कभी नहीं किया जाता। हम अपने बच्चे को सीए बनाना चाहते है पर क्या हम अपने बच्चे को आरग्यूमेंट के समय कूल रहना सिखाते हैं। हम सोचते हैं कि हमारे बच्चे 20-20 घंटे पढ़ रहे हैं पर उन बच्चों से उनकी पढ़ाई से संबंधित एक सामान्य सा प्रश्न पूछ लें तो वह बच्चा आपके सामने ठीक से उत्तर भी नहीं दे पाएगा। हमारे पास 10 मिनट का समय भी बच्चों के लिए नहीं है, पर जब वे अपने हाथ से निकल कर नहीं करने जैसा कार्य कर बैठते है तो माता-पिता के पास सर में हाथ देकर बैठने के सिवाय कुछ भी नहीं बचता। हमारा बच्चा यदि एक दिन भी स्कूल जाने से मना करें तो हम उसे डांटकर फुसलाकर आदि किसी भी तरह से स्कूल भेजने का प्रयास करते हैं, क्योंकि वहां मोटी फीस फाइन के रूप में लगती है, वहीं कोई धार्मिक पाठशाला चलती है तो वहां बच्चा नहीं जाता तो माता-पिता उसे चला लेते हैं, क्योंकि वहां फीस है और ही पेनाल्टी। मुफ्त में मिली हुई चीजों की कोई कद्र नहीं होती, यदि कद्र होती हम उसे यूं ही आई गई नहीं करते। तीस सितंबर से नवपद ओली तपस्या की अाराधना प्रारंभ हो रही है, वहीं दादा गुरुदेव इकत्तीसा जाए अनवरत रात्रि 8 से 9 बजे तक हो रह