मोह स्वार्थवश व प्रेम निस्वार्थ होता है: पं.सुरेश
घुमका| अटल बाजार में चल रहे भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में कथावाचक पं. सुरेश शर्मा ने श्रद्धालु श्रोताओं को बताया कि श्रीमद् भागवत अत्यंत पावन एवं वृहद ग्रंथ है, जिसकी रचना मानव के कल्याण एवं शांति की स्थापना के निमित हुई है।
कृष्ण जन्म, भगवान कृष्ण की बाललीला, जगत पालक विष्णु जी के चौबीसों अवतार की कथा, गजेंद्र मोक्ष रूखमणी विवाह की कथा बताते हुए कहा कि कलयुग में प्रेममार्ग अपनाना होगा, जहां मोह स्वार्थवश होता है और मोह के कारण मनुष्य रास्ता भटककर विनाश की ओर जाता है जबकि प्रेम नि:स्वार्थ होता है। प्रेम के मार्ग में चलकर प्रभु को प्राप्त किया जा सकता है। रूखमणी और भगवान कृष्ण के विवाह की व्याख्या करते हुए बताया कि रूखमणी माया का रूप है व कृष्ण ब्रह्म हैं। इसीलिए ब्रहम व माया का संयोग हुआ। भगवान कृष्ण ने रूखमणी का हरण नहीं बल्कि वरण किया था। सुदामाचरित्र का उदाहरण देकर बताया कि जैसे कुष्ण व सुदामा की मित्रता में निस्वार्थ प्रेम हैं। धर्म प्रेमियों के सहयोग से कथा के आयोजन में धर्मानुरागियों की भीड़ बढ़ रही है।
पं. सुरेश शर्मा