धमाके से सहमे ग्रामीण, गुस्से में खदान पहुंच कर मचाया हंगामा
गुरुवार दोपहर एक से डेढ़ बजे के बीच उस समय क्षेत्रवासी सहम उठे, जब पत्थर खदान में एक-एक करके दस से बारह धमाके हुए। ये धमाके इतने तीव्र थे कि ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल गए। इस धमाके के बाद ग्रामीण 40-50 ग्रामीण अनिता साहू व कुसुम स्टोन खदान में पहुंचे। ग्रामीणों ने देखा कि कुसुम स्टोन में ब्लास्टिंग के लिए लाए गए विस्फोटकों को रखा जा रहा था। वे सीधे वाहन चालक और गार्ड से पूछताछ करने लगे। भारी हंगामा किया।
थाने से ली गई अनुपति दिखाने की बात कही तो कर्मचारी जवाब न दे सके। मौके पर जिम्मेदार व्यक्ति के न होने से उनका गुस्सा बढ़ता गया। उन्होंने संचालक को बुलाने कहा। इसके अलावा उन्होंने खैरागढ़ और घुमका थाना को भी जानकारी दे दी। ब्लास्टिंग की तीव्रता की शिकायत भी पुलिस में कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से प्रशासन को सूचना दी जा रही है, लेकिन खदानों पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं।
एक बारूद धमाके में आठ से दस फीट गहरा गड्ढा: क्रेशर खदान मजदूर ने बताया कि एक कैप्सूल बारूद के धमाके की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि आठ से दस फीट गहरा हो जाता है। इससे पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों के ढेर लग जाते हैं। मिली जानकारी के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व पत्थर खदानों में इस तरह के ब्लास्टिंग करते थे तो सिर्फ चट्टानों में दरारें पड़ती थी।
ठेलकाडीह| गिट्टी खदान से हर दिन हजारों निकाले जा रही गिटि्टयां।
अपनी-अपनी बात
ब्लास्टिंग के समय जिम्मेदार व्यक्ति नहीं रहते हाजिर
खदानों में कार्य करने वाले व विस्फोटक पदार्थ लाने वाले कर्मचारियों से ग्रामीणों द्वारा पूछने पर बताया कि ब्लास्टिंग करने के लिए खदानों में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं रहता खदान में काम करने वाले मुंशी व कर्मचारी दिनेश साहू की उपस्थिति में ब्लास्टिंग करते हैं। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी प्रकार की संसाधन नहीं रहते है। मजूदरों को खदान से लगभग 100 मीटर की दूरी पर बने भवन पर बैठाया जाता है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से खदान संचालक ग्रामीणों के साथ-साथ अपने मजदूरों की जान-जोखिम में डालकर काम करवा रहे हैं।
ग्रामीणों का कथन : नहीं हो रहा नियमों का पालन
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के पत्थर खदानों में ब्लास्टिंग करने के लिए किसी भी तरह शासकीय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। वक्त-बेवक्त ही खदानों में तीव्र ब्लास्टिंग करते हैं। जिसके कारण से डूमरडीह और ठेलकाडीह रोड में आवाजाही करने में डर बना रहता है। ये खदान संचालक धमाका करने के समय बीच रोड में भारी वाहनों को अड़ाकर आवाजाही को बाधित करते है। जिससे कहीं न कहीं ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
कार्रवाई करने की बजाए ग्रामीणों को समझाया
ग्रामीणों के सूचना देने पर घुमका थाना और खैरागढ़ थाना से पहुंचे पुलिस अधिकारी मामले में जांच न कर उल्टा ग्रामीणों को ही समझाइश देने लगे, जबकि ब्लास्टिंग करने के लिए भिलाई के स्ट्रेक्स मिनरल्स से दो खदानों के लिए लगभग 275 किलोग्राम विस्फोटक बारूद लाए गए थे, जो दो बॉक्स में रखे गए थे। ये कैप्सूल नुमा बारूद का प्रत्येक नग का वजन 125 ग्राम था। ऐसे ही 400 नग कैप्सूल बारूद खुले में रखा हुआ था। इन खुले में रखे हुए बारूद से कोई भी अप्रिय घटना घट सकती थी। इस पर पुलिस कर्मी ध्यान न देकर विस्फोटक पदार्थ को सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय ग्रामीणों को ही नियम संबंधी पाठ पढ़ाने लग गए।
ग्रामीणों का आरोप: जिला प्रशासन से लगातार शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीण शिकायत के लिए पहुंचे थे। खदान में शासन के नियमानुसार ही काम हो रहा है। किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। श्रीधर मुदलियार, खदान मालिक
खदानों में ब्लास्टिंग की शिकायत लेकर ग्रामीणों के साथ खदान में पहुंचे थे। खैरागढ़ थाना और घुमका थाना में सूचना दी गई। अफसरों से शिकायत की गई। जीवन देवांगन, सरपंच ठेलकाडीह
पत्थर खदानों में ब्लास्टिंग से ठेलकाडीह के घरों व स्कूलों में धमाका होता है। इसकी शिकायत के लिए ग्रामीण पत्थर खदान में पहुंचे थे। तीव्र ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों ने लिखित शिकायत दी है। जांच करेंगे। केवी नागे, टीआई, धुमका थाना