वैचारिक अभिव्यक्ति का किया आयोजन
केन्द्रीयविद्यालय में हिंदी दिवस का समापन समारोह पूर्वक किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों के लिए वैचारिक अभिव्यक्ति नामक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डा अजय आर्य ने किया करते कहा नजर से नजरिया ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। नजर बदल गई तो नजारे बदल जाते हैं।
किश्ती का रुख बदला तो किनारे बदल जाते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में कमलेश कुशले ने भूले बिसरे पुराने गीतों से समां बांधा। हरेन्द्र साहू ने भजन प्रस्तुत किया। बसंती ठाकुर ने कहा उसको आइना दिखने की जरूरत क्या थी वो बन्दर है यह बताने की जरूरत क्या थी। नीता चौरे ने अपनी व्यंग्य रचना के माध्यम से आग्रह किया कि गाय को अगर माता कहो तो भैंस को मौसी कहा करो। शिवकुमार साहू ने काव्य पाठ किया। मुकेश कुमार ने अपने गीतों और कविता से सबका मन मोह लिया।
त्रिलोक पाठक ने गजल प्रस्तुत किया। मनीष कुमार तथा प्रवीन संग्राम सूर्यवंशी जी ने मराठी देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में निमेश, धीरेन्द्र कुमार सिंह, एकल शर्मा, आरके साहू, अमरेश कुमार, एके साहू, मिलन जाना, एनके श्रीवास्तव आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। एसके सोनी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हिंदी को अपनी पहचान बताते हुए कविता पढी। डीण्आरण् साह ने व्यंग्य रचना के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम के समापन पर अल्पाहार का प्रबंध किया गया।