छत्तीसगढ़ी संस्कृति का दिखा नजारा
गढ़ियामहोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में तीसरे दिन गुंडरदेही के जवारा लोककला मंच ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी। रात 9 बजे शुरू हुआ छत्तीसगढ़ी गीत संगीत का दौर देर रात 2 बजे तक चलता रहा। कार्यक्रम देखने बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे थे। कलाकारों ने छग के गीत, नृत्य के अलावा प्रहसन प्रस्तुत किए। प्रहसनों ने दर्शकों को जमकर हंसाया।
क्रोधमें भोजना बनाना चाहिए, खाना चाहिए : ज्ञातरहे कि कार्यक्रम स्थल में महिलाओं के बैठने विशेष प्रबंध किए गए हैं। इधर, महोत्सव के चौथे दिन रामकथा सुनाते बाबा विश्वनाथ दास ने कहा क्रोध की अवस्था में ना तो भोजन पकाना चाहिए और ना ही सेवन करना चाहिए। क्रोध में भोजन पकाने वाले और सेवन करने वाले की भक्ति नष्ट हो जाती है। शरीर साकार है लेकिन इसमें जो प्राण है वह निराकार है। यानी साकार नहीं रहेगा तो निराकार भी नहीं रहेगा। इसलिए साकार और निराकार में भेद नहीं समझना चाहिए। दोनो एक दूसरे के पूरक हैं। उदाहरण देते कहा मिठाई तो सब को नजर आती है लेकिन उसके अंदर का मीठापन निराकार है। मिठास को किसी ने देखा नहीं है इसे केवल महसूस किया जा सकता है।
उन्होंने कथा सुनाते कहा मनु और सतरूपा से भगवान प्रसन्न हो गए और वरदान मांगने कहा। मनु ने कहा आपके समान पुत्र चाहिए। यही मनु और सतरूपा अगले जन्म में दशरथ और कौशिल्या बने। दशरथ की संतान उत्पत्ति में विलंब होने के कारण वशिष्ठ ऋषि ने पुत्रेष्ठी यज्ञ के लिए श्रृंगी ऋषि को बुलाया। खीर लेकर यज्ञ में अग्रि देव प्रकट हुए। खीर का प्रसाद राजा दशरथ ने तीनों रानियों को खिलाया। कथा समाप्ति के पश्चात प्रसाद वितरण जिला साहू समाज कांकेर, राजेश एवं राकेश शुक्ला, राजा ढ्ढनानी की ओर से किया गया। बाबा विश्वनाथ ने बताया आज की कथा में वे गृहस्थ जीवन में कलह मिटाने के उपाय बताएंगे।
आज स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति
गढ़ियामहोत्सव के पांचवें दिन स्कूली बच्चों की समूह नृत्य प्रतियोगिता रखीग है। प्रतियोगिता 9 बजे शुरू हो जाएगी। आयोजन समिति से जुड़े अविनाश नेगी, नरेश परिहार धर्मेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतियोगिता दो वर्गों जूनियर तथा सीनियर में होगी। प्रतियोगिता में भाग लेने 30 स्कूलों ने पंजीयन कराया है। और भी जो प्रतिभागी दल भाग लेना चाहते हैं वे 29 सितंबर को दोपहर 2 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं।
कांकेर. गढ़िया महोत