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हास्टल सुविधा नहीं मिलने से छात्र परेशान
स्कूलोंमें 12वीं तक की कक्षा संचालित हो रही है लेकिन प्री मैट्रिक के तहत हास्टल में रूकने की व्यवस्था 10वीं तक के ही छात्र-छात्राओं को दी जा रही है। 10वीं उर्त्तीण होने के बाद छात्र-छात्राओं को हास्टल छोड़ना पड़ता है। छात्र-छात्राओं को मजबूरी में किराए के मकान में रहना पड़ता है। कई छात्र-छात्राएं तो शहर से पढ़ाई का नाता तोड़कर अपने क्षेत्र के गांव के स्कूल में ही एडमिशन करा लेते हैं।
शहर के साथ गांवों में भी अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति के छात्रों को आवासीय शिक्षा देने हास्टल संचालित है। प्री मैट्रिक के तहत 10वीं तक के ही छात्र-छात्राओंं को हास्टल में रहने की सुविधा दी जाती है। 10वीं उर्त्तीण छात्र-छात्राओ को हास्टल छोड़ना पड़ता है। हास्टल में रह वर्षों तक पढ़ाई कर चुके छात्रों को आगे पढ़ाई करने काफी परेशानी होती है। कई छात्र-छात्राएं तो किराए के घर में रहने विवश हो जाते हैं। इससे गरीब वर्ग के पालकों की परेशानी बढ़ जाती है।
छात्राओं को तो हास्टल छोड़ने के बाद और भी ज्यादा परेशानी होती है। हास्टल सुविधा से वंचित होने के बाद घर से दूर किराए के भवन में रहने से छात्राएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। छात्र-छात्राएं संबंधित अधिकारियों के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए हास्टल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। लट्टीपारा के शासकीय कन्या उमा विद्यालय की 10वीं की छात्रा भारती वारडे ने कहा 6वीं से 10वीं तक की पढ़ाई हास्टल में रहकर करने के बाद अब हास्टल की सुविधा से वंचित किए जाने के बाद ग्राम नाथिया नवागांव से लंबी दूरी तय कर आना पड़ता है।
12वीं तक पढ़ाई करने हास्टल सुविधा होना चाहिए। 12वीं की छात्रा लखनपुरी की रेशमा मेश्राम ने कहा 11वीं से हास्टल की सुविधा से वंचित किए जाने के बाद अब लखनपुरी से रोजाना आना पड़ रहा है। इसमें पैसे के साथ अनावश्यक समय की बर्बादी हो रही है। नरहरदेव स्कूल के अजय सलाम, सूर्यकांत मरकाम, चंद्रशेखर मंडावी, हेमंत कुमार कुंजाम, रामेश्वर सलाम ने कहा 10वीं के बाद हास्टल सुविधा से वंचित किए जाने के बाद छात्रों को काफी परेशानी होती है। गरीब वर्ग तो किराए के घर का वहन नहीं कर सकते हैं। कई छात्र तो टीसी लेकर अपने गांव के स्कूल में ही पढ़ाई करने चले जाते हैं।
कांकेर। हास्टल सुविधा नहीं मिलने से 11वीं-12वीं के छात्र परे