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स्कूली छोटे बच्चे भी नशे के लिए करने लगे हैं छिंदरस और सल्फी का सेवन
जिलेमें लोग देशी-विदेशी शराब ही नहीं बल्कि सल्फी एवं छिंद पेड़ से निकलने रस का सेवन भी बड़े पैमाने पर नशे के लिए करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी सल्फी एवं छिंद रस के कारोबार ने पांव पसार लिए हैं। सस्ता तथा गांव गांव में उपलब्ध होने के कारण बड़ी संख्या में लोग इसका सेवन करते हैं। सबसे खराब बात है की इस प्राकृतिक पेय का असर बढ़ाने लोग इसमें यूरिया तथा अन्य रासायनिक दवाएं मिलाने लगे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक ही नहीं बल्कि घातक भी है।
भास्कर ने जायजा लिया तो पता चला गांव में बुजुर्गो के साथ युवा ही नहीं बल्कि स्कूली बच्चे भी इसका सेवन कर रहे हैं। जिले में इसके व्यवसाय का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की आंध्रप्रदेश से कुछ परिवार यहां आते हैं तथा वे पेड़ से सल्फी और छिंद रस निकाल इसका व्यवसाय करते हैं। इनके अलावा बहुत से स्थानीय लोग भी इसका व्यवसाय कर रहे हैं। बढ़ती मांग के चलते सल्फी, छिंदरस में लोग रासायनिक दवा तथा यूरिया आदी मिलाकर बेचते हैं। इससे मादकता बढ़ती है लेकिन यह शरीर के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक है। छिंद रस तथा सल्फी का अधिक सेवन शरीर के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक साबित होता है। इससे शरीर में वात रोग और गठिया होने की आशंका बढ़ जाती है।
जानकारों के अनुसार शरीर में आलस्य भी उत्पन्न होता है। गांव में इसका सेवन करने की प्रवृति बहुत ज्यादा बढ़ी है। बहुत ज्यादा सेवन करने से शरीर के लिए नुकसानदायक है। आजकल पेड़ से निकलने वाले रस में कुछ रासायनिक पदार्थ मिलाया जाता है जो बेहद खतरनाक है। इसका सेवन करने से शरीर में नशा बहुत ज्यादा हो जाता है।
पढ़ने वाले बच्चों को तो इसका सेवन करना ही नहीं चाहिए। इससे शरीर में कफ बढ़ता है। जोड़ो में भी समस्या उत्पन्न होती है। स्कुल, कालेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को तो इसके सेवन करने से पूरी तरह से बचना चाहिए।
12 घंटे में भरता है एक मटका
छिंद,सल्फी रस निकालने पेड़ की शाखा को छिलकर उसमें मटका बांध दिया जाता है। सामान्यत: शाम को मटका बांधा जाता है। रात भर पेड़ की शाखा से बूंद-बूंद मटके में टपकती है। सुबह तक मटका पूरी तरह से भर जाता है। इसे उतारकर सेवन किया जाता है। कई लोग सुबह भी मटका बांध देते हैं। सल्फी और छिंद रस प्रति गिलास 10 रूपए की दर से बिकता है।
स्वास्थ्यके लिए घातक
जिलाअस्पताल में पदस्थ डा लोकेश देव ने कहा छिंदरस तथा सल्फी एक प्रकार का नशा ही है। नशा हमेशा शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालता है। आयुर्वेदिक डाक्टर केके मिश्र ने कहा यदि नए हंडी में छिंद या सल्फी रस पेड़ से निकाला जाए और हंडी को सुबह सूर्योदय से पूर्व ही उतार कर थोड़े मात्रा में सेवन किया जाए तो इसके कुछ फायदे हैं लेकिन बहुत ज्यादा समय तक पेड़ में रस को रखने तथा अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से स्वास्थ्य प्रतिकुल प्रभाव पड़ता है। इन प्राकृतिक पेय में रासायनिक दवाओं को मिलाया जाना बेहद घातक है।
कांकेर. इसी प्रकार बांधते हैं मटकी।