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गर्मी की दस्तक, हैंडपंप अभी से खराब

6 वर्ष पहले
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गर्मीकी शुरुआत में ही पानी की किल्लत सामने आने लगी है। शहर मेें बहुत से हैंडपंप हैं, लेकिन ज्यादातर खराब पड़े हैं। खराब हैंडपंपों के चलते लोगों को अभी से पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। विभाग इनकी मरम्मत नहीं करा रहा है जिसे लेकर वार्डवासियों में नाराजगी है। शहर में हालत ये है की एक हैंडपंप आधा से अधिक मलबा में दब गया है तो दूसरा सीसी सड़क निर्माण के बाद इतना नीचे गया है की वहां भरने के लिए छोटी सी बाल्टी तक नहीं रखी जा सकती।

भंडारीपारा वार्ड में तो एक से अधिक हैंडपंप खराब स्थिति में है। नंदी चौक के पास हैंडपंप दो वर्ष से खराब पड़ा है। पहले इस हैंडपंप का उपयोग हो रहा था लेकिन अब नहीं हो रहा है। तालाब के पास का हैंडपंप भी सालभर से खराब है।

हैंडपंप के पास तो अनुपयोगी झाड़ियां तक उग गई है। पत्थर्री पारा जाने के मार्ग में घनी बसाहट वाले जगह पर हैंडपंप से पानी जरूर रहा है लेकिन पानी साफ नहीं आता है। हैंडपंप की सबसे ज्यादा खराब स्थिति शीतला तालाब जाने के मार्ग में एक दुकान के पास है जहां हैंडपंप मलबा से दब गया है। पहले हैंडपंप का उपयोग वार्डवासियों के अलावा मार्ग से गुजरने वाले लोग भी करते थे। वार्ड के देवेश यादव, दिनेश यादव, राकेश ठाकुर, महेश यादव, लक्ष्मीनारायण यादव ने बताया कि वार्ड में कुछ हैंडपंप पूरी तरह से अनुपयोगी हो चुके हैं। गर्मी का मौसम रहा है।

अलबेलापारा वार्ड में एक हैंडपंप सालभर से ज्यादा समय से पूरी तरह से खराब स्थिति में है। वार्ड के रामनारायण उइके ने कहा कि खराब पड़े हैंडपंप को बनाने के लिए ध्यान देना चाहिए। इस हैंडपंप के अलावा आसपास और कोई हैंडपंप नहीं है। वार्ड के एक हैंडपंप में लौहचूर्ण पानी आता है। डडिया तालाब में लगा हैंडपंप भी खराब स्थिति में है। तालाब से लगे शिव मंदिर में पहुंचने वाले श्रध्दालुओं के साथ मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भी परेशानी होती है। व्यवसायी अजय शर्मा, ललित सिन्हा ने कहा कि शिव मंदिर से लगे खराब हैंडपंप को सुधारना चाहिए। गढ़िया पहाड़ के किनारे लगा हुआ हैंडपंप भी खराब होने से पानी नहीं निकल रहा है। इससे पहाड़ चढ़ने वाले श्रध्दालुओं को परेशानी होती है। कुछ स्कूलों के हैंडपंप से लौहयुक्त पानी निकलता है जो पीने योज्य नहीं है।

कई गांवों में शाला परिसर तथा शाला के निकट हेंडपंप तो है लेकिन उनमें से अनेकों में आयरन युक्त पानी आने के कारण उपयोग पेयजल के लिए नहीं हो पाता। लौह युक्त पानी पेयजल उपयोग करने से शरीर के अनेकों अंगों पर सीधा असर पड़ता है। जिले के आयरन युक्त बेल्टों में जहां के हेंडपंपों को लाल रंग से चिंहित किया गया है वहां पेयजल के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे हैंडपंपों में फिल्टर प्लांट भी नहीं लगाए गए है। गांवों के अलावा शहरी क्षेत्र में भी कुछ हैंडपंप आयरन प्रभावी है। शहरी क्षेत्र में दो सौ हेंडपंप हंै जिनमें से कुछ में आयरन युक्त पानी आता है। शहरी क्षेत्र के आयरन युक्त पंपो में किसी प्रकार का चिंन्हाकन नहीं किया गया है। अलबेलापारा मे 6 हंैंडपंप है। पार्षद रमेश गौतम ने बताया प्राय: में आयरन युक्त पानी आता है।

श्रीराम नगर वार्ड के एक हैंडपंप में भी आयरन युक्त पानी आता है इसलिए इस जल का उपयोग पेयजल के रूप में कोई नहीं करता।

^शहर के सभी हैंडपंपों का सर्वे कराया जाएगा। जो खराब होंगे उनकी तत्काल मरम्मत कराई जाएगी। जहां आयरनयुक्त पानी रहा होगा वहां फिल्टर प्लांट लगाने प्रस्ताव बनाया जाएगा। अन्य समस्याओं का भी शीघ्र निराकरण किया जाएगा। एसडीशर्मा, एसडीओ, नगर पालिका परिषद, कांकेर

^शहरों में हैंडपंप बनाने की जिम्मेवारी नगरपालिका की है। पीएचई विभाग की नहीं है। जिन हैंडपंपो में लौहयुक्त पानी रहा है उसमे जरूरत आवश्यकतानुसार फिल्टर मशीन लगाई जाएगी ताकी लोगो को शुध्द पानी मिले। आईपीमंडावी, कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग कांकेर

जल हानिकारक

^आयरनयुक्त जल पीने से सदा बचना चाहिए। यह शरीर के लिए हानिप्रद है। इसे पीने से शारीरिक क्षमता कम होती है। लीवर, किडनी भी प्रभावित होते है। डाडीके तुर्रे, सीएमएचओ, कांकेर

आयरनयुक्त पानी वाले हैंडपंप खतरनाक

ग्रीष्मआगमन के साथ जिले में पेयजल की किल्लत बढ़ेगी। वर्तमान में जिले के 1068 राजस्व गांव में हेंडपंपों की संख्या 10719 है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आयरन तथा फ्लोराईड युक्त पानी देने वाले हैंडपंपों की संख्या 149 मात्र है जबकि वास्तव में ये आंकड़ा 1000 से ऊपर है। विभाग के अनुसार ऐसे हेंडपंपों का उपयोग मात्र निस्तारी कार्य में करना चाहिए, पेयजल के लिए नहीं।

सीसी सड़क की भेंट चढ़ा हैंडपंप

शिवनगरवार्ड में तो प्राथमिक स्कुल के बाहर लगा हैंडपंप सालभर पहले सीसी रोड के निर्माण के कारण पूरी तरह से अनुपयोगी हो गया। सीसी रोड के निर्माण के दौरान निर्माण काम बेहतर ढंग से नहीं होने के कारण हैंडपंप सड़क के ही लेबल में गया। अब हैंडपंप में छोटी बाल्टी या बर्तन भी नहीं रखा जा सकता है।

अघननगर मेें मुरूम में पटा हैंडपंप

अघननगर वार्ड में सड़क किनारे एक हैंडपंप भी पूरी तरह से मुरूम से 6 माह पहले काफी ज्यादा पट चुका है। पहले जब हैंडपंप चालू हालत में था तो नेशनल हाईवे से लगे दुकान कई वाडवासी सहित राहगीर पानी पीने का उपयोग करते थे। वार्ड के अंदर एक हैंडपंप में काफी कम पानी निकलता है। जिससे कई वार्डवासी परेशान है।

पानी पीने के दुष्प्रभाव

ब्रेन,किडनी, हड्डियां होती है प्रभावित। दांतो में जम जाता है पीलापन। महिलाओं बच्चों में रोग पनपता है जल्दी। गर्भस्थ शिशु के लिए सबसे खतरनाक।

149

आयरन तथा फ्लोराईड युक्त पानी देने वाले हैंडपंप

10719

कांकेर जिले में कुल हैंडपंप

भंडारीपारा का हैंडपंप दो साल से खराब।

अघननगर में हैंडपंप की हालत ऐसी है।

शिवनगर में सड़क निर्माण की भेंट चढ़ा

कांकेर. भंडारीपारा में हैंडपंप दबा दिया।