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भीड़ को देखकर भालू ने दिनभर गुजारा पेड़ पर

7 वर्ष पहले
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सोमवारको एक बार फिर शहर से सटे गोविंदपुर बस्ती में एक मादा भालू अपने बच्चे के साथ घुस आई। भालू के बस्ती में पहुंचने की खबर पाकर उसे देखने लोगों का हुजूम वहां जमा हो गया।

भीड़ से बचने दहशतजदा मादा भालू बच्चे समेत नेशनल हाईवे किनारे एक बाड़ी में खड़े पेड़ पर चढ़ गई। उसने 11 घंटे तक पेड़ पर ही आसन जमाए रखा। वन विभाग भी उसे निकालने छेड़छाड़ कर जोखिम उठाने के बजाए अंधेरा होने का इंतजार करने लगा। पेड़ पर चढ़ा भालू दिन भर राहगीरों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। रास्ते से गुजरने वाले लोग रूक रूक कर भालू को देखते रहे। जब अंधेरा गहराया तो मादा भालू और उसका बच्चा स्वत: ही पेड़ से उतर पहाड़ी की ओर चले गए।

गोविंदपुर के निकट पहाड़ी खेत में आए दिन भालू देखे जाते हैं। जिनका रात में बस्ती में घुस आना आम बात बनी हुई है। लेकिन सोमवर सुबह दो भालू बस्ती के निकट खेत में देखे गए। सुबह स्कूल रहे बच्चों ने सड़क किनारे दोनों को देख शोर मचाने लगे। कुछ देर बाद वहां और लोगों की भीड़ जमा हो गई। दिन निकल आने तथा गलियों में भीड़ होने के कारण भालुओं के लिए विकट स्थिति पैदा हो गई। और भीड़ के द्वारा लगातार मचाए जा रहे शोर के कारण वे जान बचाते बस्ती की ओर भागने लगे। सुबह 8 बजे वे गोविंदपुर निवासी राजूराव लाम्बा के घर में घुसे और बाड़ी में पेड़ पर चढ़ कर बैठ गए। सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। इसके पीछे पीछे पुलिस विभाग भी वहां पहुंच गया।

शेषपेज 14 पर

भालूकी खबर पाकर वहां लोगों की भीड़ भी जमा होने लगी। उत्साहित भीड़ को देख वन विभाग ने भालु को सुरक्षित रखने तथा लोगों को भालु के हमले से बचाने वहां से भीड़ हटवाया। नेशनल हाईवे 30 के किनारे जिस बाड़ी के पेड़ में भालू चढ़े थे उसे चारो ओर से रस्सी से ब्लाक कर अंदर किसी के भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।

इसके साथ ही वहां चारों ओर वन विभाग के कर्मचारियों ने दिन भर डेरा डाल रखा था। ताकि भालू को कोई नुकसान पहुंचाए और इससे कहीं भालू लोगों पर हमला कर दे। शाम 6 बजे जब अंधेरा हुआ तो मादा भालू और उसका बच्चा दोनों पेड़ से उतर सेंट माईकल स्कूल की पहाड़ी की ओर चले गए। भालू निकले की खबर पाकर डीएफओ के अलावा एसडीओपी विरेंद्र शर्मा, टीआई दीनबंधु उईके, रेंजर पीएनआर नायडु समेत बड़ी संख्या में पुलिस जवान वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे।

कांकेर। भालू की सुरक्षा के लिए