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तीन साल में चिन्हित हुई जमीन हैंडोवर नहीं हो पाई अब तक

7 वर्ष पहले
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आने-जाने की दिक्कत दूर होगी संवेदनशील क्षेत्रों में

}कांकेरमें 51, बस्तर 98, दंतेवाड़ा 117,

नारायणपुर 9 और बीजापुर में 32,

कुल 307 भवन संभाग के 32 स्थानों

पर बनाए जाने हैं।

}दो कमरे, रसोई, बाथरूम का सेट

तैयार होगा 6 लाख रुपए में बनेगा

एक सेट। इसी आधार पर संवेदनशील

इलाकों में तैयार होनी है शिक्षकों की

कॉलोनियां।

}लोकेशन ढूंढने की जिम्मेदारी सभी

जिलों के कलेक्टरों को दी गई है।

प्राथमिक शिक्षा, मिडिल से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाने वालों को मिलनी है सुविधा।

जगदलपुर| संवेदनशीलइलाकों में दूर सामान्य क्षेत्रों में नहीं बना पा रहे शिक्षकों के आशियाने। कलेक्टरों को तय करनी है लोकेशन बस्तर के 32 ब्लाक में। इस सत्र में भी नहीं नसीब होंगे शिक्षकों को आशियाने।

2012 के शिक्षा सत्र में मानव संसाधन मंत्रालय केंद्र सरकार ने बस्तर संभाग के दूर-दराज और संवेदनशील इलाकों में शिक्षकों के लिए 32 लोकेशन पर 307 आवासीय भवन बनाने का फैसला लिया था। इसके लिए 50 फीसदी राशि जारी भी हो चुकी है। वहीं स्थिति यह है कि तीसरा सत्र 40 फीसदी गुजर चुका है। अब जाकर तोकापाल और लोहांडीगुड़ा इलाकों में जमीन चिन्हित हुई है। लेकिन वहां भी जमीन शिक्षा विभाग को हैंड ओव्हर करने में प्रशासन का पसीना छूट रहा है।

हालांकि जिले के बाकी 5 ब्लाक में जमीन की तलाश ही हो रही है। इससे साफ हो रहा है कि शिक्षकों के आवास जैसी महत्वपूर्ण योजना संवेदनशील इलाकों में तो छोड़ो सामान्य क्षेत्रों में भी क्रियान्वित नहीं हो पा रही। इसके चलते मौजूदा सत्र में भी टीचर्स को मकान नसीब होने की उम्मीद नहीं है। समस्या को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने शासन को पत्र लिख कर कहा है कि जमीन की व्यवस्था होने पर काम शुरु करवाया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में 10-20 किमी की दूरी तय करके अध्यापकों को स्कूलों में आने-जाने में दिक्कत होती है।