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दो दुष्कर्मियों को दस-दस वर्ष कैद

7 वर्ष पहले
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तीन युवक बाइक पर जबरदस्ती बैठकर ले गए थे नाबालिग छात्र को, एक के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने से उसे रिहा कर दिया गया

भास्करन्यूज | कांकेर

एकतरफा प्रेम के चलते अपने साथियों के साथ मिलकर नाबालिग छात्रा का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को न्यायालय ने दस दस वर्ष की सजा सुनाई। दुष्कर्म की घटना के बाद 24 घंटे तक आरोपी ने उसे अपने कब्जे में रखा और अंत में उसे अकेले छोड़ दिया था। जैसे तैसे अपने परिजनों के पास पहुंची छात्रा ने घटना के तीसरे दिन आरोपियों के खिलाफ नरहरपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिस पर पुलिस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जिसमें दो को सजा सुनाई गई और एक के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने पर न्यायालय ने उसे छोड़ दिया।

मामले के अनुसार घटना नरहरपुर विकासखंड के ग्राम बिरनपुर की है। यहां एक 15 वर्षीय कक्षा सातवीं की छात्रा 16 जून की रात 8 बजे गांव में आयोजित शादी समारोह से अपनी सहेलियों के साथ घर लौट रही थी। इसी दौरान एक नई मोटर साइकिल पर सवार तीन युवक मन्नूराम शोरी सहित दो अन्य ने छात्रा को जबरदस्ती बाइक बैठा लिया और ले गए। अचानक हुई इस घटना से घबराई छात्रा की सहेलियों ने बजाए किसी को बताने डर के चलते चुप्पी साध ली थी। एक ही बाईक में सवार चारों ग्राम डुमरपानी पहुंचे तथा छात्रा को स्कूल में कैद कर रखे रहे। दूसरे दिन तड़के 4.30 बजे तीनों युवकों छात्रा को गंवरपहाड़ी के जंगल में ले गए। दिन भर छात्रा को इसी पहाड़ी जंगल में रखा गया।

मिली जानकारी के अनुसार यहां घटना का प्रमुख आरोपी मन्नूराम ने छात्रा से दुष्कर्म किया था। घटना के बाद 17 जून की रात 8 बजे छात्रा को युवकों ने ग्राम बिरनपुर के बाहर वन विभाग के नर्सरी प्लांटेशन में छोड़ फरार हो गए थे। छात्रा रात 10 बजे जैसे तैसे गांव पहुंची तथा ग्रामीण रतनु के घर बाहर परछी में सो गई थी। 18 जून की सुबह जब ग्रामीणों ने गांव में लापता छात्रा सोते पाया तो मामला उजागर हुआ था। घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 363, 366, 376, 34 भादवि के अलावा लैगिंग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5(एल) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामला न्यायालय में पेश किया था। मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमपी सिंघल ने मंगलवार को सुनवाई करते मामले की आरोपी मन्नूराम शोरी मनोज विश्वकर्मा