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आठ आंगनबाड़ी के लिए भवन स्वीकृत, बन सका एक ही
शहरमें पांच वर्षों से कई आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन एक ही आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बनकर तैयार हो पाया है।
8 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तो भवन बनने राशि भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन भवन अब तक नहीं बन सके हैं। भवन के अभाव में किराए के मकानों में आंगनबाड़ी केंद्र बेहद असुविधा के बीच संचालित हो रहे हैं। अब अधिकारी कह रहे हैं कि चुनावों के कारण काम में देरी हुई है।
कांकेर शहर में 2010 में 42 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हुए हैं। कुछ वार्डों में तो तीन से चार आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हो रहे हैं, लेकिन अब तक शिवनगर वार्ड में ही आंगनबाड़ी भवन बनकर तैयार हुआ है। अन्य किसी भी वार्ड में भवन नहीं बन पाया है। कहीं किराए के छोटे खपरैल वाले घर तो कहीं रामायण मंडली या सांस्कृतिक भवन में आंगनबाड़ी संचालित हो रही है।
शिकायत है कि इनमें भी शौचालय आदि की सुविधा नहीं होने से नन्हे बच्चों को काफी परेशानी हो रही है। टीकाकरण दिवस पर बड़ी संख्या में पहुंचने वाली हितग्राही महिलाओं को भी इससे काफी परेशानी होती है। सुभाष वार्ड में तो सड़क किनारे नदिया पारा बाजारपारा का आंगनबाड़ी केंद्र भवन बिल्कुल सड़क किनारे लगा हुआ है।
शहर के राजापारा नदिया पारा, राजापारा आवासपारा, एमजी वार्ड में देवारपारा, नदीपारा, स्कुलपारा, भट्टीपारा, भंडारीपारा का नदियापारा, स्कूलपारा में आंगनबाड़ी केंद्र के भवन के लिए राशि 2013-14 में ही स्वीकृत हो गई लेकिन इनमें से अब तक एक में भी भवन नहीं बन पाया है। प्रत्येक भवन के लिए 4.50 लाख की राशि स्वीकृत हुई है। प्रथम किस्त की राशि 2.81 लाख रूपए भी निर्माण एजेंसी को प्रदाय की जा चुकी है।
चुनाव के कारण विलंब
^चुनावके कारण आंगनबाड़ी भवन निर्माण में इतना विलंब हुआ है। शीघ्र जगह चयन कराकर स्वीकृत राशि वाले आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य में तेजी लाने का प्रयास किया जाएगा। सीएसमिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, कांकेर
कांकेर. भवन के अभाव में कुछ इस तरह टूटे फूटे कमरों में संचालित हो रहे हैं, शहर में आंगनबाड़ी केंद्र।