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सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट के लिए तलाश रहे जमीन

7 वर्ष पहले
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घटना स्थल सुरक्षित रखना नहीं रहता आसान

दूसरेजिलों समेत कांकेर के सारे प्रकरण यहां आते हैं। प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें रायपुर समेत अन्य स्थानों पर भेजा जाता है। कांकेर में सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट शुरू होने से वहां तत्काल भौतिक साक्ष्य इकट्ठे होंगे। उसके बाद क्षेत्रीय लैब में भेजने समय कम लगेगा। इसमें अहम यह है कि किसी वारदात के बाद ज्यादा समय तक घटना स्थल को सुरक्षित रखना आसान नहीं रहता। पुलिस के कई कर्मचारी इसमें एक्सपर्ट भी नहीं रहते। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि पुलिस को ही सही ढंग से मदद नहीं मिल पाती। इसके अलावा कांकेर में यूनिट रहने से अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंच सकेंगे। इतना ही नहीं कांकेर से सटे कोंडागांव जिले के एक बड़े हिस्से में भी पुलिस की सुविधा बढ़ जाएगी।

सैकड़ों मील की दूरी तय करनी पड़ती है छोटी-मोटी जांच के लिए। कांकेर में सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट को मिली थी मंजूरी दो साल पहले।

भास्कर न्यूज | जगदलपुर

वैज्ञानिकजांच के लिए संभाग के सभी जिलों को बस्तर जिला मुख्यालय में स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक लैब पर निर्भर होना पड़ता है।

केरल राज्य से बड़े बस्तर संभाग के सभी जिलों में सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट शुरू करने का प्रस्ताव शासन के पास पड़ा हुआ है। जिसमें से दो साल पहले कांकेर के लिए इसकी मंजूरी मिल गई थी। स्थिति यह है कि दो साल में वहां जमीन की तलाश ही पूरी नहीं हो पाई है। कांकेर में सीन आॅफ क्राइम मोबाइल यूनिट की स्थापना से वहां जिला स्तर की तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कार्यालय खुलने से वहां जरूरत के अनुसार अधिकारियों-कर्मचारियों की पोस्टिंग भी हो जाएगी। जिससे क्षेत्रीय लैब का काम कुछ हद तक हल्का हो सकेगा। माना जा रहा था कि अप्रैल 2014 तक वहां काम शुरू होगा लेकिन अभी तक वहां जमीन को लेकर मशक्कत हो रही है। ज्वाइंट डायरेक्टर फॉरेंसिक डॉ. बी सूरी बाबू के मुताबिक कांकेर में एक-दो लोकेशन देखी गई है।

कोशिश हो रही है कि जमीन का बड़ा टुकड़ा मिल जाए। जिसमें सारी व्यवस्था सुचारू हो। जमीन मिलते ही वहां काम शुरू करवाया जाएगा।