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दो साल पहले खोदे तालाब की मजदूरी नहीं

5 वर्ष पहले
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मनरेगा ग्रामीण मजदूरों को राहत देने के बजाए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। हर दूसरे दिन मनरेगा के भुगतान की शिकायत लेकर मजदूर जिला कार्यालय पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को आमाबेड़ा के ग्रामीण जिला कार्यालय पहुंचे और दो साल से भुगतान न मिलने की शिकायत की।

ग्रामीण मजदूर इतवारीन नाग आमाबेड़ा, सगारू राम सोड़े, संजीव ध्रुव कोहचुड़ ने बताया कि 2012-13 में वन विभाग की ओर से ग्राम पंचायत फुफगांव के आश्रित ग्राम कोहचुड़ में निजी तालाब का निर्माण कराया गया। इसमें कोहचुड़ के 27 मजदूर, सोड़े के 21 और आमाबेड़ा के नौ मजदूरों ने काम किया था। इनकी मजदूरी 103680 रुपए बनी थी, जो कि अब तक नहीं दी गई है। लंबित मजदूरी मांगने पर क्षेत्र के वन विभाग के बीट गार्ड ने मजदूरी भुगतान की राशि का चेक नहीं मिलने की बात कही है।

जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत की गई। उन्होंने भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। मजदूर इसी पिछले दो साल से भुगतान के लिए विभिन्न कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। मजदूरी भुगतान की मांग करने वालों में लखमू, सताऊ, रजनी, मंगतुु, शत्रुघन, दुर्भूराम, दशमी, मानबत्ती समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।

कांकेर. मनरेगा की लंबित मजदूरी मांगने पहुंचे आमाबेड़ा क्षेत्र के ग्रामीण।

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