स्कूलों में कम्प्यूटर शट डाउन शिक्षा योजना हुई ऑफलाइन
राज्य समेत जिले के स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर से जोड़ने शुरू की गई कंप्यूटर शिक्षा योजना दो साल से बंद है। 15 साल पहले शुरू हुई योजना लगातार बदलाव का शिकार होती रही। कभी योजना का नाम बदला, तो कभी स्कूलों की संख्या घटाई गई। अंतिम दौर में योजना जिले के 15 स्कूल तक सिमट कर रह गई थी। 2013 से बंद पड़ी योजना को दोबारा जिंदा करने के लिए विभाग की कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। स्कूल के कंप्यूटर लैब पर ताले लटक रहे हैं और अंदर कंप्यूटर धूल खाकर कंडम होते जा रहे हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास और रोजगार की अपार संभावना को देखते हुए 2001 में प्रदेशभर के चयनित हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की शुरुआत की गई थी। बालिकाओं के बीच कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने 2001 में इंदिरा सूचना शक्ति योजना शुरू की गई। योजना के संचालन के लिए 2001 से 2004 तक कंप्यूटर शिक्षा संस्था आईसेक्ट से अनुबंध किया गया था। 2005 में योजना का नाम बदल कर छत्तीसगढ़ सूचना शक्ति योजना कर दिया गया। इसके साथ ही एनआईआईटी के साथ 2009 तक अनुबंध किया गया।
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अनुबंध समाप्त होने के बाद 2009 से योजना को इंफरमेशन कम्युनिकेशन टेक्नालॉजी एट स्कूल के नाम से शुरू किया गया। इसमें शुरू के दौर में सिर्फ 10 स्कूलों का चयन किया गया। 2010 में पांच और स्कूलों को जोड़ा गया। 2012-13 तक योजना को सुचारू रूप से चलाने सभी प्राचार्य सहित संबंधित शिक्षकों को बेसिक एंड एडवांस कोर्स की जानकारी दी गई। 2013 में संबंधित कंपनी ने स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं कराई और कंपनी के डिफाल्टर होने के बाद योजना दोबारा शुरू ही नहीं हो सकी। आखिरकार कम्प्युटर शिक्षा बंद पड़ी है।
अंतिम दौर में इन स्कूलों में चल रही योजना
जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अंतागढ़, पखांजुर, बांदे, कोरर, चारामा, लखनपुरी, तासरगांव, जेपरा, अरौद, नरहरपुर, सरोना, दवेगांव, लारगांव मरकाटोल, शासकीय हाईस्कूल शीतलापारा कांकेर और आसुलखार में कंप्यूटर शिक्षा योजना चल रही थी। इन सभी स्कूलों से 10-10 कम्प्युटर और प्रिंटर दिए गए थे। योजना बंद होने के बाद से वे स्कूलों में पड़े-पड़े खराब हो गए हैं।
शिक्षकों के भविष्य से भी खिलवाड़
कम्प्युटर शिक्षा बंद कर कम्प्युटर शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। योजना के बीच में ही 2008 में सभी हायर सेकंडरी स्कूलों के लिए नया सेटअप आया था। एक-एक कंप्यूटर व्याख्याता का पद स्वीकृत किया गया। शैक्षणिक योग्यता एमएससी कम्प्युटर, आईटी, एमसीए, पीजी कंप्यूटर डिप्लोमा थी। संस्था से अनुबंध समाप्त होने के बाद इन पदों पर भर्ती होना था, जो कि आज तक नहीं हो सका है।
कम्प्यूटर शिक्षा के लिए कोई योजना नहीं
जिले के सभी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा बंद है। कंप्यूटर शिक्षा शुरू करने वर्तमान में कोई योजना नहीं है। शासन से योजना आएगी, तो कंप्यूटर शिक्षा शुरू की जाएगी। एसके भरतद्वाज, डीईओ कांकेर
निजी संस्थानों का आसरा
छात्रों के अनुसार सरकारी स्कूल में कम्प्यूटर शिक्षा बंद पड़ी है, जबकि निजी स्कूलों में यह कोर्स का हिस्सा है। सरकारी स्कूलों के बच्चों को कम्प्युटर शिक्षा के लिए निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसमें भारी-भरकम फीस वसूल की जाती है।
15 साल पहले शुरू हुई योजना के कोई नतीजे नहीं निकले
कांकेर. शीतलापारा हासे. स्कूल में योजना के बंद होने के बाद से बेकार कंप्यूटर।
कांकेर. कंप्यूटर कक्ष पर ताला।