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नदी में पिचिंग नहीं होने से हर साल बढ़ रहा कटाव

5 वर्ष पहले
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नवागांव भावगीर में नदी तट पर पिचिंग नहीं होने से हर साल तेज बहाव के चलते किनारों पर कटाव बढ़ता जा रहा है। 2012 में आई बाढ़ के चलते गांव की करीब 10 एकड़ खेत को भारी नुकसान हुआ था। ग्रामीण पिछले दस साल से नदी पर पिचिंग की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। नदी पर ही करोड़ों की लागत से एनीकट बनाया गया है, लेकिन इसका भी लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

ग्राम नवागांव भावगीर में नदी तट में पिचिंग नहीं हो पाई है, जिससे नदी तट का तेजी से कटाव हो रहा है। 2012 में नदी तट में पिचिंग का कटाव होने से पानी उफान बस्ती की ओर चला गया था। इससे कई एकड़ खेत को नुकसान हुआ था। कई घरों को भी इससे नुकसान हुआ था। 10 साल से गांव के नदी तट में पिचिंग की मांग की जा रही है, जिसे पूरा नहीं किया जा रहा है। नदी तट का कटाव इतना ज्यादा बढ़ रहा है कि मेला स्थल की दूरी कटाव से काफी करीब पहुंच गई है। ग्रामीण नदी में पिचिंग की मांग को लेकर जल संसाधन विभाग, कलेक्टर जनदर्शन में भी ज्ञापन सौंप चुके हैं। गांव के मनोज साहू, बुधारू पटेल, सुखचंद निषाद, रामजी कुरेटी, कचरूराम पटेल ने बताया कि नदी तट में पिचिंग नहीं होने से नदी का कटाव बढ़ रहा है।







पिचिंग के अभाव में नदी का पानी बारिश में गांव में घुस जाता है।

एनीकट का लाभ सिर्फ दो किसानों को मिल रहा
नदी में 2013 में 156.89 लाख रुपए से 70 मीटर लंबा व 2 मीटर ऊंचा एनीकट बनाया गया है। एनीकट में गर्मी में भी पानी रहता है, लेकिन इसका उपयोग सिर्फ निस्तारी और पशु-पक्षियों के लिए हो पाता है। एनीकट बनाने के दौरान 150 हेक्टेयर खेत की सिंचाई का लक्ष्य रखा गया था। वर्तमान में सिर्फ दो किसानों की चार एकड़ में ही सिंचाई हो पा रही है। किसानों ने एनीकट से खेतों तक पानी ले जाने के लिए नाली निर्माण की मांग की है। ईश्वर कुरेटी, बुधारू पटेल, पंचम दुग्गा ने कहा नाली बनने से ही बहुत से किसान खेती कर सकते हैं। नाली बेहद जरूरी है। गांव के बिशंभर पटेल ने कहा कि पोल उनके खेत तक नहीं पहुंचे है। इस कारण वे पंप से खेती नहीं कर पा रहे हैं और खेत सूखा पड़ा है। गांव में ऐसे कई किसान हैं, जो बिजली नहीं पहुंचने से खेती नहीं कर पा रहे हैं।

एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है शासन को
जनदर्शन से विभाग को नवागांव भावगीर में नदी तट में पिचिंग के लिए ज्ञापन मिला है। एस्टीमेट बनाकर 15 दिन पहले शासन को भेजा गया है। पहले भी इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही पिचिंग का काम होगा। एसबी मित्रा, एसडीओ, जल संसाधन विभाग, कांकेर

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