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पॉलीथिन पर प्रतिबंध से महिलाओं को मिल गया नया रोजगार
पाॅलीथिनपर लगाया गया प्रतिबंध जहां पर्यावरण की रक्षा होगी, वहीं यह अब घर में खाली बैठी महिलाओं के लिए अच्छी कमाई का जरीया भी बन रहा है। जिले में पाॅलीथिन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा है। जिसके बाद से पेपर से बने ठोंगे चलन में गए और वह महिलाओं को इसका कारोबारी बना दिया। शहर में अब ठोंगे की तेजी से मांग बढ़ती जा रही है। नतीजा नाम मात्र की पूंजी से शुरू होने वाला यह कारोबार भी अब तेजी से घरों में शुरू होने लगा है।
शहर में कुछ समूह द्वारा तो कुछ व्यक्तिगत रूप से इस कारोबार को शुरू कर ठोंगा तैयार किया जा रहा है। तैयार माल के लिए खरीददार भी तैयार रहते हैं। जिससे महिलाओं द्वारा तैयार ठोंगा हाथों हाथ बिक रहा है और घर बैठे उन्हें आमदनी हो रही है।
शहर में यह कार्य अचानक पिछले एक माह से रफ्तार पकड़ने लगा और आज हर दिन इस कारोबार से एक समूह या महिला जुड़ रही है। वर्तमान में शहर में कुछ समूह सौ से अधिक महिलाएं इस कार्य को अंजाम दे रही है। प्रतिदिन एक महिला द्वारा दो किलो ठोंगा तैयार किया जा रहा है। जिसके अनुसार दिन भर में शहर में एक क्विंटल से अधिक ठोंगा तैयार हो रहा है और मांग भी उसी अनुरूप की जा रही है।
घरबैठे मिल गया रोजगार : इसव्यवसाय से जुड़ी आमापारा की महिला शेषपेज 18 पर
चंद्रिकायादव, मालती यादव, दिप्ती यादव, जनक ठाकुर, गंगा हिरवानी, लक्ष्मी यादव, सोनाई नाग, भान सिन्हा, रेखा यादव, बबली सिंह आदि ने बताया कि ठोंगा निर्माण के रूप में उन्हें घर बैठे रोजगार मिल गया है। इसके लिए उन्हें कहीं आने जाने की जरूरत नहीं पड़ती और घर पर ही आमदनी हो रही है। घर में खाली वक्त में ठोंगा बनाने जुट जाते हैं। प्रतिदिन औसतन दो किलो ठोंगा तैयार कर लेते हैं। इसमें कोई भारी लागत भी नहीं है। जिसे हर महिला थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर घर पर ही अपना व्यवसाय शुरू कर सकती है।
पुराने अखबार से कमाई
वर्तमानमें ठोंगा खासकर पुराने अखबारों से तैयार किया जा रहा है। जिसकी कीमत 12 रूपए प्रति किलो है। इसके अलावा कुछ व्यवसायियों द्वारा महिलाओं को अखबार उपलब्ध करा कर उन्हें प्रति किलो ठोंगा तैयार करने 30 रूपए मेहनताना दे रहे हैं। तैयार ठोंगा में अपने हिस्से के आठ रूपए जोड़ उसे व्यवसायी बाजार में 50 रूपए प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। वहीं कुछ समूह महिलाएं स्वयं बाजार से पुराना अखबरा खरीद ठोंगा तैयार कर रही है। उन्हें सीधे बाजार में बेच कर भी लाभ ले रही हैं।
नहीं करना चाहिए उपयोग
ठोंगाबनाने के कारोबार से जुड़ी महिलाओं को मलाल है कि प्रतिबंध का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण अब भी शहर में चोरी छिपे गांव देहात में पॉलीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे ठोंगे की खपत अनुपात में काफी कम है। यदि पॉलीथिन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा तो ठोंगा की मांग के अनुसार कीमत तो बढ़ेगी ही साथ और भी महिलाओं को रोजगार मिल जाएगा।
कांकेर. कागज के ठोंगों की बढ़ी मांग, इसे बनाते हुए महिलाएं।