प्रतिबंधित पॉलीथिन फिर से बाजार में
राज्य समेत जिले में जोर-शोर से चलाया गया पॉलीथिन पर प्रतिबंध का अभियान धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है। पॉलीथिन पर प्रतिबंध तो अब भी है, लेकिन बाजारों में इसका खुलेआम उपयोग हो रहा है। प्रतिबंध की शुरुआत में कार्रवाई के चलते कुछ समय तक इसका प्रचलन चोरी-छिपे होता रहा। कार्रवाई के अभाव में एक बार फिर पॉलीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से होने लगा है।
राज्य शासन ने जनवरी 2015 में पॉलीथिन के कैरी बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। प्रशासन और नगर पालिका ने दल गठित कर कारोबारियों पर कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के चलते शहर में पॉलीथिन का प्रचलन काफी कम हुआ था। नगर पालिका का दल अगले कुछ महीने तक दुकानों पर छापामार कार्रवाई कर पॉलीथिन जब्त करता रहा। इसके बाद धीरे-धीरे कार्रवाई में कमी आती गई। इसके चलते एक बार फिर शहर में पॉलीथिन का प्रयोग बढ़ने लगा है। अब तक चोरी-छिपे इसका प्रयोग हो रहा था, जो कि पिछले कुछ समय से खुलेआम हो रहा है। किराना दुकान, सब्जी बाजार, हाेटल सहित अन्य दुकानों में एक बार फिर पॉलीथिन में ही सामान दिया जा रहा है।
फिर से चलाया जाएगा अभियान
पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध है। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता है। नगर पालिका में बनी टीम को नोटिस जारी कर फिर से पॉलीथिन का उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने कहा जाएगा। रेणुका श्रीवास्तव, एसडीएम, कांकेर
कागज के ठोंगों का कारोबार हुआ ठप
पॉलीथिन पर प्रतिबंध के बाद विकल्प के तौर पर कागज के ठोंगों को बढ़ावा दिया गया। ठोंगों की मांग भी काफी बढ़ी और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलने लगा। एक बार फिर से पॉलीथिन का चलन बढ़ने से ठोंगों की मांग कम होने लगी है। भानबाई सिन्हा, बैसाखिन नाग, ममता यादव के अनुसार पॉलीथिन का उपयोग फिर से शुरू होने से दुकानदारों ने कागज के ठोंगों में सामान देना बंद कर दिया है।
पर्यावरण को खतरा, पॉलीथिन पर कड़ाई से प्रतिबंध की मांग
समाजसेवी संस्था से जुड़े मोहन सेनापति का कहना है कि पॉलीथिन से पर्यावरण को खतरा है। इसलिए पॉलीथिन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। इसके लिए प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करना जरूरी है। ग्राम सिदेसर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के रसायन विषय के व्याख्याता फरजाना शेखानी के अनुसार पॉलीथिन कार्बनिक यौगिक है। यह सड़ता नहीं है। इसे जलाने से जहरीली गैस मोनो आक्साइड निकलती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। नरहरदेव स्कूल के व्याख्याता मो. असलम का कहना है कि पॉलीथिन पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक है। इसके अलावा डिस्पोजल भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं।
कांकेर. धड़ल्ले से हो रहा प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग।
कांकेर. दुकानों में खुलेआम बिक रहा पॉलीथिन।