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124 साल पुराना भवन, 3 साल से कक्षाएं नहीं

4 वर्ष पहले
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प्रशासन नहीं दे रहा कोई ध्यान
शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष चित्ररेखा गोस्वामी ने कहा हर वर्ष खंड शिक्षा कार्यालय, सहायक आयुक्त कार्यालय, शिक्षा विभाग व नगर पालिका अधिकारियों से रियासतकालीन भवन के जीर्णोद्धार की मांग करती है, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

कांकेर| शहर में अंग्रेजों के शासन काल से चली आ रही 124 साल पुरानी पुत्री शाला देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा है। इसके चलते यहां तीन साल से कक्षाएं लगाना बंद कर दी गई है। प्राथमिक शाला की पांचों कक्षाएं अतिरिक्त कक्ष में लग रही है, जहां कमरों के अभाव में पहली व दूसरी कक्षा एक साथ लगाई जा रही है।

विभाग की उदासीनता के चलते स्कूल भवन की हालत दयनीय होती जा रही है। शाला प्रबंधन समिति कई बार भवन मरम्मत की मांग प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। एमजी वार्ड स्थित पुत्री शाला 1891 से संचालित है। पुत्री शाला का रियासतकालीन भवन देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहा है। खपरैल टूटने से हल्की बारिश होते ही कमरों में पानी टपकने लगता है। भारी बारिश होने पर कमरों में पानी भर जाता है। इस रियासतकालीन भवन में कक्षाएं तीन वर्षों से नहीं लग रही है। भवन में अंतिम बार 2005 में नए खपरैल लगाए गए थे। इसके बाद स्कूल भवन में अब तक कोई मरम्मत ही नहीं हुई है। स्कूल मेंं खपरैल टूटने के साथ बरामदे के बाहर कुछ जगह दीवार भी कमजोर हो चुकी है। भवन के अंदर दीवार मजबूत है। रियासतकालीन भवन का संकुल स्तर की मीटिंग के साथ पालकों के सम्मेलन के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

कराएंगे मरम्मत
जिला शिक्षा अधिकारी एसके भरतद्वाज ने कहा स्कूल से भवन के संबंध में पूरी रिपोर्ट मंगवाएंगे। फिर स्कूल भवन का मरम्मत कार्य कराया जाएगा।

खतरा
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