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तक्षशिला के पुनरुद्धार से जुड़े प्रश्न

7 वर्ष पहले
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ही तेरा देर से आना, बहाना बनाना आैर कहना कि वादा तो निभाया, देर से आई, दूर से आई पर वादा तो निभाया\\\' नायक देव आनंद आैर नायिका हेमा मालिनी पर ‘जॉनी मेरा नाम’ के लिए यह गीत विजय आनंद ने तक्षशिला के अवशेष पर फिल्माया था आैर गीत की स्थिति मजेदार थी कि पुलिस की नाक के नीचे, तस्करी के माल की हेरा-फेरी हो रही है आैर असल माल के संकेत भी गीत के शब्दों में छुपे हैं। यह पैंतरा हमारे सिनेमा का आजमाया हुआ खेल है आैर विगत वर्ष ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में भी रेल के डिब्बे में नायक-नायिका यही खेल खेलते हैं। सन् 1970 में प्रदर्शित ‘जॉनी मेरा नाम’ के गीत की याद इसलिए आई कि तक्षशिला विश्वविद्यालय को पुन: प्रारंभ करने के लिए वर्षों पूर्व केंद्रीय सरकार ने ‘तक्षशिला एक्ट’ पारित किया था आैर बिहार सरकार ने कानून पास करके बजट में प्रावधान किया था। लगभग सात सौ वर्ष ईसा पूर्व, तक्षशिला ज्ञान का केंद्र था। ज्ञातव्य है कि इंग्लैंड का ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय लगभग ग्यारह सौ वर्ष पुराना है। तक्षशिला शताब्दियों से बंद पड़ा था। आज उसमें एक हजार आवेदनों में से केवल पंद्रह छात्र चुने गए हैं। किसी भी शैक्षणिक परम्परा को पुन: प्रारंभ करना शुभ कार्य है परंतु वहां अब क्या पढ़ाया जाएगा तथा कौन पढ़ाने वाला है- यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज भारत में अनेक शैक्षणिक संस्थाएं सक्रिय हैं आैर ऐसी भी संस्थाएं हैं जो अमेरिकन संस्थाआें में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम को पढ़ा रही हैं। भारत में विदेश जाकर शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की पूर्व तैयारी के लिए भी अनेक संस्थाएं हैं। देश में शिक्षा के नक्शे पर आपको अनेक केंद्र दिखाई देंगे परंतु क्या पढ़ाया जा रहा है आैर कौन पढ़ा रहा है- यह पूरी तरह किसी को पता नहीं। अनेक शहरों में ऐसी संस्थाएं हैं जो पूरी फीस लेकर छात्र को सौ प्रतिशत उपस्थिति का प्रमाण-पत्र देते हैं तथा छात्र प्राइवेट ट्यूशन केंद्र में पढ़ाई करता है जहां उसे परीक्षा पास करने की शिक्षा दी जाती है आैर वह उस हाजरी देने वाली संस्था की फीस केवल परीक्षा में बैठने की ‘पात्रता’ के लिए भर रहा है जबकि उसे कही आैर शिक्षित किया जा रहा है। पूरी शिक्षा में केवल सफलता का मंत्र सिखाया जा रहा है, ज्ञान अब मुद्दा नहीं है। दरअसल भारत में शिक्षा का व्यवसाय कितना विराट है आैर शिक्षा कितनी खोखली हो चुकी है- इस आेर देश के शक्तिशाली लोगों