पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जब संसद में पासवान बोले मैं कर ही क्या सकता हूं?

जब संसद में पासवान बोले- मैं कर ही क्या सकता हूं?

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अभिलाष खांडेकर|नई दिल्ली. एकमहत्वपूर्ण विभाग का केंद्रीय मंत्री कितना असहाय हो सकता है? उपभोक्ता मामले, खाद्य और जनवितरण मंत्री राम विलास पासवान से पूछिए। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंगलवार को उनकी लाचारी जाहिर हो गई।

पासवान को खाद्य पदार्थों में मिलावट से जुड़े सवालों के मौखिक जवाब देने थे। पहले तो अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने जवाब दे दिए। लेकिन जब अलग-अलग राज्यों के सांसदों ने पूरक प्रश्न पूछे तो पासवान बोले, \\\"मैं पिछले दस दिन से फूड सेफ्टी और अन्य मामलों में आंकड़े मांग रहा हूं, लेकिन कोई भी राज्य मदद नहीं कर रहा। खाद्य सुरक्षा और मानकों का मुद्दा राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कई राज्यों में तो इसके लिए बुनियादी ढांचा और स्टाफ ही नहीं है। देश की 125 करोड़ की आबादी में राष्ट्रपति से लेकर चपरासी तक, सब लोग खाद्य पदार्थ खाते हैं। पेय पीते हैं। लेकिन यदि राज्यों के पास पर्याप्त समितियां नहीं है। सेफ्टी कमिश्नर नहीं हैं।

टेस्टिंग लैबोरटरी और फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स रेगुलेशन 2011 और एफएसएस एक्ट 2006 के तहत ट्रिब्यूनल नहीं है तो अपराधियों को पकड़ना काफी मश्किल है।\\\'

मिलावट पर लाचारी