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नीतिगत ब्याज दरों में कटौती से क्यों बच रहा रिजर्व बैंक

7 वर्ष पहले
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िरव्यू

{आर. जगन्नाथन

वीकली

इकाेनॉमी

रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने 3 दिसंबर को नीतिगत ब्याज दरों में कटौती से इनकार करते हुए कारोबारियों और सरकार को नि‍राश किया। वह भी ऐसे समय जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई दर और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित थोक महंगाई दर पहले ही घटकर क्रमश: 5.5 और 1.77 फीसदी पर गई है। अगले हफ्ते इनके नवंबर 2014 के आंकड़े जारी होंगे। इनमें यह और नीचे सकती है।

आरबीआई ने खुदरा महंगाई दर को जनवरी 2015 तक 8 फीसदी तक रखने और जनवरी 2016 तक 6 फीसदी तक रखने का लक्ष्य रखा है। चूंकि खुदरा महंगाई दर इसके जनवरी 2016 के लक्ष्य से पहले ही नीचे चुकी है, कारोबारी जगत इस बात पर चकित है कि इसके बावजूद आरबीआई ब्याज दरों में कटौती से बच क्यों रहा है। राजन ने अगले साल की शुरुआत में (मार्च या अप्रैल) में रेट कट का वादा करने के बजाय सिर्फ यह कहा है कि फिलहाल मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव करना जल्दबाजी होगी। लेकिन यदि महंगाई में गिरावट का रुझान जारी रहता है, इसमें और गिरावट आती है, राजकोषीय घटनाक्रम उत्साहवर्धक रहते हैं तो अगले साल की शुरुआत में मौद्रिक नीति में बदलाव संभव है। इसके लिए आरबीआई समीक्षा चक्र से बाहर जाकर भी कटौती कर सकता है। केंद्रीय बैंक अगली दो समीक्षाएं फरवरी और अप्रैल में करेगा। हो सकता है फरवरी में रेट कट हो, लेकिन मार्च या अप्रैल में इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

अब सवाल यह है कि जब खुदरा महंगाई दर के लिए जनवरी 2016 का लक्ष्य आंशिक रूप से पहले ही हासिल हो चुका है तब क्या राजन का सतर्कता अपनाना सही हैॽ दरअसल महंगाई दर में आंशिक से रूप से कमी \\\"बेस इफेक्ट\\\' के कारण आई है। बेस इफेक्ट पिछले साल की महंगाई के सूचकांक के अंक पर निर्भर करता है। अगर यह पिछले साल अधि‍क रहा हो तो इस साल की महंगाई दर इस बेस इफेक्ट के मुकाबले कम दिखाई देगी। इसी तरह यदि पिछले साल महंगाई का सूचकांक कम रहा हा़े तो इस साल महंगाई दर बढ़ी हुई दिखेगी, क्योंकि जिस बेस (आधार) पर महंगाई का आकलन किया जा रहा है वह पिछले साल कम था।

थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई को ही लें। वर्ष 2013 में यह नवंबर तक हर महीने बढ़ा था। जनवरी 2013 में यह 170.30 पर था और नवंबर तक बढ़कर 181.50 की ऊंचाई पर पहुंच गया था। इसके बाद दिसंबर 2013, जनवरी और फरवरी 2014 में