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नौकरशाह ही सीवीसी क्यों बनें, आम आदमी क्यों नहीं: कोर्ट
नई दिल्ली | केंद्रीयसतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और सतर्कता आयुक्तों (सीवी) की नियुक्ति प्रक्रिया सवालों में है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। फिर पूछा, ‘आखिर इन पदों पर नौकरशाहों का चयन ही क्यों किया जाता है। आम आदमी को यह मौका क्यों नहीं दिया जाए?’ कोर्ट ने केंद्र से इन सवालों का जवाब नौ अक्टूबर तक मांगा है। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी। चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा, जस्टिस कुरियन जोसेफ और आरएफ नरीमन की बेंच ने गुरुवार को यह निर्देश दिए। बेंच एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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बेंचने कहा, ‘ऐसा लगता है कि सरकार केवल एक वर्ग के लोगों तक ही नियुक्तियों को सीमित कर रही है। जबकि कानून में दूसरों के लिए भी प्रावधान हैं। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। और जब प्रतिभाएं मौजूद हों तो ऐसी नियुक्ति प्रक्रिया क्यों अपनाई जाए। जिससे प्रतिभावान व्यक्ति सीवीसी जैसे पद से वंचित रह जाएं।’ चीफ जस्टिस लोढ़ा ने कहा, ‘ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण विशेषता होनी चाहिए। बंद कमरों में चयन और एक वर्ग के लिए पद सीमित करने से भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिलता है।’
अभी जारी है सीवीसी चुनने की प्रक्रिया : सरकार
इससे पहले राम जेठमलानी और प्रशांत भूषण ने बुधवार को कोर्ट से बताया था कि सरकार ने सीवीसी चुन लिया है। हवाला एक अखबार की रिपोर्ट का दिया। गुरुवार को अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इसे गलत बताया। कहा कि सीवीसी की नियुक्ति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है, तब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। सीवीसी प्रदीप कुमार का कार्यकाल 28 सितंबर को पूरा हो रहा है।
सरकार से नौ अक्टूबर तक जवाब देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा