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आरटीआई के िलए कांग्रेस-भाजपा को नोटिस

7 वर्ष पहले
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केंद्रीयसूचना आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को कारण बताओ नोटिस दिया है। इन नेताओं को उनके राजनीतिक दलों में सूचना का अधिकार लागू नहीं करने पर चार हफ्तों में जवाब मांगा गया है।

बसपा प्रमुख मायावती और एनसीपी प्रमुख शरद पवार को भी इसी तरह के नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है। सीआईसी (केंद्रीय सूचना आयोग) के नोटिस में पूछा गया है, ‘क्यों आपके खिलाफ जांच शुरू की जाए। क्योंकि आरटीआई कानून लागू करने के आयोग के तीन जून 2013 के आदेश का आपने पालन नहीं किया।’ आयोग ने कहा कि अगर चार हफ्ते में जवाब नहीं आया तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सीआईसी को निर्देश दिए थे।



इसमें कहा था कि आरटीआई लागू नहीं करने पर सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल अर्जी पर आयोग छह महीने में फैसला करे।

छह राजनीतिक पार्टियों को लागू करना है आरटीआई

केंद्रीयसूचना आयोग ने छह राष्ट्रीय दलों-कांग्रेस, भाजपा, बसपा एनसीपी, भाकपा और माकपा को पब्लिक अथॉरिटी माना है। पिछले साल इन सभी दलों को आरटीआई कानून के दायरे में लाया गया था। इनमें से किसी भी दल ने सीआईसी के फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी। ही आरटीआई कानून को लागू किया। इस पर आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल आयोग में अर्जी लगाई। इस पर आयोग ने इस साल सात फरवरी और 25 मार्च को दलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।



दलों ने इन नोटिसों के जवाब भी नहीं दिए।