जन्नत में तबाही
कश्मीर की बाढ़ में डूबे सेना के हथियार
भास्कर न्यूज नेटवर्क/एजेंसी. जम्मू/श्रीनगर/नईदिल्ली
जम्मू कश्मीर में लोगों को बचा रही सेना को भी भारी नुकसान हुआ है। कश्मीर घाटी में मौजूद सैन्य शिविरों में सैकड़ों एके, इनसास और एसएलआर राइफलें पानी में डूबी हुई हैं। इनमें से कई बेकार हो चुकी हैं। बम और हैंड ग्रेनेड जैसे अन्य जंगी साजो-सामान का भी कुछ ऐसा ही हाल है। अपने साजो-सामान की फिक्र करते हुए सेना हर दिन 20 घंटे राहत अभियान चला रही है।
घाटी के एक सैन्य शिविर में तो 26 एके राइफलें पानी में बह गईं। श्रीनगर के गोगजीबाग इलाके में पिछले रविवार केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के 400 जवानों को कैम्प छोड़ना पड़ा था। एक जवान का कहना है, ‘हमें आदेश थे कि सब कुछ वहीं छोड़कर पहले अपनी जान बचाएं। वहां हमारे हथियार डूबे हुए हैं।’ एक और जवान ने कहा, ‘कुछ राइफलें तो ऑइलिंग और सर्विसिंग के बाद काम करने लायक हो जाएंगी। लेकिन पानी में डूब जाने के बाद बम और हैंड ग्रेनेड काम नहीं सकेंगे।’ 103वीं इंजीनियर रेजिमेंट के सुबेदार और मानद लेफ्टिनेंट एस.पी. सिंह बताते हैं, ‘हम राहत अभियान तड़के चार बजे शुरू करते हैं। यह रात 12 बजे खत्म होता है। बाकी जवान चार घंटे में सारी नौकाओं की सर्विसिंग करते हैं।’
{कुछ राइफलें दुरुस्त हो जाएंगी, लेकिन बेकार हो चुके हैं बम, ग्रेनेड
{ जम्मू-कश्मीर में पानी घटा, सेना पर पथराव की घटनाएं बढ़ीं
{ पथराव के कारण वायुसेना के कुछ विमानों को नुकसान
बीएसएनएल देगी फ्री टॉक टाइम
केंद्रीयदूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को बताया कि कश्मीरी इलाकों में एक हफ्ते के लिए बीएसएनएल फ्री टॉक टाइम देगी। निजी कंपनियों ने भी हर दिन 60 मिनट का फ्री टॉक टाइम देने की बात कही है।
उत्तराखंड से भी बड़ा है जम्मू कश्मीर में राहत अभियान
वायुसेनाके एयर वाइस मार्शल उपकारजीत सिंह ने कहा है कि जिन डेढ़ लाख लोगों को बचाया गया है, उनमें बड़ा हिस्सा विमानों-हेलिकॉप्टरों से निकाले गए लोगों का भी है। वायुसेना का यह अभियान पिछले साल उत्तराखंड में आई बाढ़ और भूस्खलन से भी बड़ा है।
बाढ़ में बह गया जम्मू कश्मीर का अधिकतर सरकारी रिकॉर्ड
जम्मूकश्मीर की बाढ़ में राज्य का अधिकतर सरकारी रिकॉर्ड भी बह गया है। पुलिस, कोर्ट, सचिवालय समेत कई विभागों के रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा है। इसका आकलन इसी बात