सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश मिलना चाहिए: थरूर
तिरुवनंतपुरम | पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा है कि उनकी पार्टी सबरीमाला मंदिर में पुरानी परंपरा बरकरार रखने की पक्षधर है, लेकिन उनकी निजी राय है कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए। रीतियों-परंपराओं में बदलाव आना जरूरी है। यह मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है और इसमें 10 से 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश की मनाही है। पिछले माह सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की स्पेशल बेंच ने मंदिर प्रबंधन से पूछा था, ‘आप मंदिर में महिलाओं को प्रवेश क्यों नहीं देते?’
आप किस आधार पर महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित कर रहे हैं। इसके पीछे आपका तर्क क्या है? महिलाएं जाना चाहें या फिर न जाना चाहें लेकिन यह उनकी निजी पसंद होना चाहिए।
कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड से अपने इस दावे की पुष्टि में सबूत उपलबध कराने को कहा है जिससे पता चले कि मंदिर सदियों पुरानी परंपरा का पालन कर रहा है।