आर्थिक स्थिति ...
आर्थिक स्थिति ...
चाहतेतो दत्तू भी यही थे कि डॉक्टर या इंजीनियर बनें। लेकिन पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि पिता दोनों को डॉक्टर या इंजीनियर बना सके। ऐसे में दत्तू ने पिता से कहा कि आप बहन को एमबीबीएस करने दीजिए, मैं कुछ और कर लूंगा। इसके बाद दत्तू ने लॉ किया और काबिल वकील बने। वह खानदान के पहले व्यक्ति रहे, जिन्होंने वकालत के पेशे को अपनाया। उन्हें कर्नाटक में उन्हें एक सुयोग्य- गैरराजनीतिक वकील माना जाता है। बेंगलुरु में प्रैक्टिस करते हुए उन्होंने सिविल, क्रिमिनल, कंस्टीट्यूशनल और टैक्सेशन के मुकदमे लड़े। बेंगलुरु में लोग आज भी याद करते हैं कि गरीबों के पक्षधर दत्तू अनेक मुकदमों में फीस भी नहीं लेते थे। जस्टिस दत्तू के बहुत कम मित्र हैं और खाली वक्त में अकेले रहना पसंद करते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि शुक्रवार शाम को जिस कार से वह सुप्रीम कोर्ट से घर पहुंचते हैं वह कार सीधे सोमवार की सुबह सुप्रीम कोर्ट के लिए ही निकलती है।
जेलललिता...
कोर्टने जयललिता के साथ-साथ उनकी सहेली शशिकला, बेदखल दत्तक पुत्र वीएन सुधाकरन और भतीजी इलावरसी को भी दोषी ठहराया है। इन तीनों को 4-4 साल की जेल और 10-10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। फैसले के लिए बेंगलुरू के बाहरी इलाके परप्पाना अग्राहारा स्थित केंद्रीय जेल में अस्थायी अदालत बनाई गई थी। विशेष जज जॉन माइकल डिकुन्हा ने फैसला सुनाया। सजा सुनाते ही पुलिस ने जयललिता को हिरासत में ले लिया। लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। मामला तमिलनाडु का है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की सुनवाई पड़ोसी राज्य कर्नाटक के बेंगलुरू में हो रही थी।
दोनों ही बार सितंबर में ही फैसला : 2001 भी सितंबर में ही सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता के खिलाफ फैसला सुनाया था। और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गवांनी पड़ी थी। इस बार भी सितंबर में ही फैसला आया है।
पीठपर वार...
भाजपाके ‘छत्रपति का आशीर्वाद, चलो चलें मोदी के साथ’ नारे पर उद्धव ने कहा कि इस चुनाव में उनके साथ कौन है और कौन नहीं है, इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं है। और महाराष्ट्र की जनता बताएगी कि छत्रपति का आशीर्वाद किसके साथ है। उद्धव ने भाजपा को चेताया कि 25 साल से शिवसैनिक उसके साथ थे इसलिए उन्हें बिल्ली समझने की भूल वे करें। शिवसैनिक बाघ हैं और बाघ हमेशा बाघ ह